रिकॉर्ड वॉल्यूम के बावजूद शेयर में क्यों आई गिरावट?
Indian Energy Exchange (IEX) ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) में 141 अरब यूनिट (BU) बिजली का ट्रेड करके एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। यह पिछले साल की तुलना में 17% की शानदार बढ़ोतरी है। इस मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस का श्रेय मुख्य रूप से इसके रियल-टाइम मार्केट (RTM) और ग्रीन मार्केट सेगमेंट को जाता है। हालांकि, शेयर बाजार में इस खबर का कोई खास असर नहीं हुआ। 6 अप्रैल 2026 तक, IEX के शेयर ₹119.42 के स्तर पर कारोबार कर रहे थे, जो अपने 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर ₹215.40 से लगभग 50% नीचे है। मुख्य चिंता यह है कि रिकॉर्ड वॉल्यूम ग्रोथ के साथ-साथ बिजली की कीमतें भी गिरी हैं, जिसने IEX के भविष्य के मुनाफे और वैल्यूएशन (Valuation) पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रोथ के पीछे रियल-टाइम और ग्रीन मार्केट का दम
IEX की वॉल्यूम ग्रोथ के पीछे रियल-टाइम मार्केट (RTM) और ग्रीन मार्केट का बड़ा योगदान रहा। FY26 में RTM में 41% की जबरदस्त सालाना बढ़ोतरी देखी गई, जो 54.85 अरब यूनिट तक पहुंच गया। चौथी तिमाही में RTM की ग्रोथ 48.2% रही। वहीं, ग्रीन मार्केट (जिसमें ग्रीन डे-अहेड और ग्रीन टर्म-अहेड सेगमेंट शामिल हैं) में भी 23% की वृद्धि के साथ पूरे वित्त वर्ष में 10.78 अरब यूनिट का ट्रेड हुआ। रिन्यूएबल एनर्जी सर्टिफिकेट्स (RECs) ने भी सालाना 187.20 लाख यूनिट के रिकॉर्ड ट्रेड के साथ 5% की बढ़ोतरी दर्ज की। मार्च 2026 में REC वॉल्यूम में तो 119.9% का उछाल देखा गया।
मांग मामूली, सप्लाई ज्यादा: कीमतों पर भारी दबाव
FY26 में बिजली की कुल मांग में मामूली 1.1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इस दौरान बिजली की सप्लाई में भारी इजाफा हुआ, क्योंकि देश ने इस वित्त वर्ष में करीब 55 गीगावाट (GW) नई पावर कैपेसिटी जोड़ी। सप्लाई बढ़ने से एक्सचेंज पर लिक्विडिटी बढ़ी और कीमतों पर दबाव आया। नतीजतन, डे-अहेड मार्केट (DAM) की औसत कीमत 13.7% घटकर ₹3.86 प्रति यूनिट रह गई, जबकि RTM की कीमतें 16% गिरकर ₹3.59 प्रति यूनिट पर आ गईं।
मार्केट पर दबदबा और वैल्यूएशन का सवाल
IEX भारतीय एनर्जी एक्सचेंज मार्केट में 90% से अधिक हिस्सेदारी के साथ अपना दबदबा बनाए हुए है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Cap) लगभग ₹10,642 करोड़ है। इसका पिछले बारह महीनों का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 21.7x से 26.3x के बीच है। यह वैल्यूएशन (Valuation) ग्लोबल पीयर्स जैसे Euronext (13.4x P/E) और CME Group Inc. (19.0x P/E) की तुलना में प्रतिस्पर्धी लगता है। हालांकि, IEX का P/E रेश्यो ऐतिहासिक तौर पर काफी अधिक रहा है, जो मार्च 2022 में 71.2x तक पहुंचा था और FY21-FY25 के दौरान औसतन 46.8x रहा। मौजूदा P/E अपने ऐतिहासिक औसत से काफी कम है, लेकिन धीमी ग्रोथ और गिरती कीमतों के बीच यह वैल्यूएशन निवेशकों को चिंतित कर रहा है।
भविष्य के जोखिम: गिरती कीमतें और रेगुलेटरी बदलाव
IEX के भविष्य पर कम कीमतों और रेगुलेटरी बदलावों का खतरा मंडरा रहा है। मार्च 2026 में डे-अहेड मार्केट में कीमतें 6% गिरकर ₹4.20 और रियल-टाइम मार्केट में 10.5% गिरकर ₹3.71 पर आ गईं। इससे जेनरेटरों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ रहा है, जो IEX के रेवेन्यू मॉडल के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इसका रेवेन्यू ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर निर्भर करता है, न कि प्राइस डिफरेंस पर। इसके अलावा, वर्चुअल पावर परचेज एग्रीमेंट्स (VPPAs) और ओवर-द-काउंटर (OTC) मार्केट्स जैसे नए रेगुलेटरी प्रपोजल से प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है और IEX के प्रभुत्व पर असर पड़ सकता है।
एनालिस्ट्स की राय और आगे की राह
विश्लेषकों का दृष्टिकोण आम तौर पर सकारात्मक है, जिनमें 'मॉडरेट बाय' या 'बाय' रेटिंग और टारगेट प्राइस में संभावित अपसाइड का संकेत मिलता है। हालांकि, क्या मौजूदा वैल्यूएशन टिकाऊ है और गिरती कीमतों का क्या असर होगा, यह चिंताएं बनी हुई हैं। IEX का भविष्य मूल्य दबावों को प्रबंधित करने, नए नियमों के अनुकूल होने और विशेष रूप से ग्रीन मार्केट सेगमेंट में वॉल्यूम ग्रोथ बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करेगा। FY27 में राष्ट्रीय बिजली मांग के 5% तक वापस लौटने का अनुमान है, जो मदद कर सकता है, लेकिन सप्लाई और डिमांड का संतुलन मूल्य खोज के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा।