IEX Electricity Volumes Surge: बिजली के कारोबार में रिकॉर्ड उछाल, पर REC मार्केट में आई भारी गिरावट!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
IEX Electricity Volumes Surge: बिजली के कारोबार में रिकॉर्ड उछाल, पर REC मार्केट में आई भारी गिरावट!
Overview

Indian Energy Exchange (IEX) ने अप्रैल 2026 के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी के बिजली ट्रेडिंग वॉल्यूम (electricity trading volumes) में **16.6%** का जोरदार इजाफा हुआ, जो **12,341 मिलियन यूनिट** तक पहुंच गया। लेकिन, दूसरी तरफ रिन्यूएबल एनर्जी सर्टिफिकेट (REC) मार्केट में भारी गिरावट दर्ज की गई।

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बिजली का कारोबार चमका, पर ग्रीन सर्टिफिकेट मार्केट में 'क्यों' लगी गिरावट?

भारतीय एनर्जी एक्सचेंज (IEX) ने अप्रैल 2026 में दमदार परफॉर्मेंस दिखाया है। कुल ट्रेडेड बिजली वॉल्यूम (traded electricity volumes) में पिछले साल के मुकाबले 16.6% का उछाल आया, जो 12,341 मिलियन यूनिट (MU) पर पहुंच गया। इस तेजी की मुख्य वजह रिकॉर्ड तोड़ बिजली की मांग रही, जो 256 GW तक पहुंची। गर्मी और खराब मौसम के चलते डिमांड बढ़ी। एक्सचेंज के रियल-टाइम मार्केट (RTM) में वॉल्यूम 30.2% बढ़कर 5,069 MU हो गया, वहीं डे-अहेड मार्केट (DAM) में 8.7% की बढ़ोतरी के साथ 4,624 MU का कारोबार हुआ। RTM का औसत प्राइस ₹4.82 प्रति यूनिट और DAM का ₹5.26 प्रति यूनिट रहा।

हालांकि, IEX के ग्रीन मार्केट (Green Day-Ahead और Green Term-Ahead) में वॉल्यूम में मामूली 7.5% की बढ़ोतरी देखी गई, जो 841 MU पर रहा। लेकिन REC मार्केट का हाल काफी खराब रहा। यहां वॉल्यूम में भारी 59.4% की गिरावट आई, और अप्रैल 2026 में केवल 1.18 लाख RECs का कारोबार हुआ। यह गिरावट तब आई जब बाय बिड्स (buy bids) बढ़ीं और सेल बिड्स (sell bids) घटीं, जिससे क्लियरिंग प्राइस ₹339 और ₹370 प्रति REC पर पहुंचा। यह REC मार्केट में किसी बड़ी समस्या का संकेत है, जो फिजिकल बिजली ट्रेडिंग की रौनक के बिल्कुल उलट है।

डीटेल्ड एनालिसिस: डायवर्जेंस क्यों?

यह अंतर भारत के एनर्जी सेक्टर में चल रहे बड़े बदलावों को दिखाता है। अप्रैल में कुल एनर्जी कंजम्पशन 4% बढ़कर 154 बिलियन यूनिट रहा। फिजिकल बिजली की डिमांड औद्योगिक, व्यावसायिक और घरेलू इस्तेमाल से काफी मजबूत है, खासकर गर्मी के मौसम में। इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 ने मार्केट डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया है। भारत के 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी के लक्ष्य के बावजूद, REC मार्केट का सिकुड़ना बताता है कि ग्रीन एनर्जी के एट्रीब्यूट्स (attributes) को बेचने के तरीके में कुछ दिक्कतें आ रही हैं। यह RPO (Renewable Purchase Obligation) की एनफोर्समेंट, पिछले सालों की ओवरसप्लाई या रेगुलेटरी कॉम्प्लेक्सिटी से जुड़ा हो सकता है।

एनालिस्ट्स की राय और चिंताएं

REC ट्रेडिंग में इतनी बड़ी गिरावट चिंता का विषय है। भले ही बाय इंटरेस्ट बढ़ा हो, लेकिन यह मार्केट की डिमांड और अवेलेबिलिटी/प्राइसिंग स्ट्रक्चर के बीच गैप दिखाता है। एनालिस्ट्स (analysts) IEX को लेकर मिले-जुले राय दे रहे हैं, 'न्यूट्रल' या 'मॉडरेट सेल' की रेटिंग आम है, और प्राइस टारगेट ₹121 से ₹141 के बीच हैं। कुछ एनालिस्ट्स ने 'वॉल्यूम और मार्जिन रेजिलिएंस' (volume and margin resilience) पर चिंता जताई है। CERC के मार्केट कपलिंग (market coupling) जैसे संभावित रेगुलेटरी बदलाव भी एक्सचेंज ऑपरेटरों के लिए अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं। IEX का बिजली ट्रेडिंग मार्केट शेयर 98% से ज्यादा है, लेकिन REC मार्केट की कमजोरी उसके ओवरऑल रेवेन्यू डाइवर्सिफिकेशन और ग्रोथ पर असर डाल सकती है। कंपनी का P/E रेशियो 23 गुना है, और मार्केट कैप लगभग ₹11,300 करोड़ है।

आगे क्या?

आगे चलकर, IEX का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस मजबूत रहा है। FY26 में रेवेन्यू और PAT में डबल-डिजिट ग्रोथ देखी गई। एनालिस्ट प्राइस टारगेट मिले-जुले हैं, लेकिन निवेशक सतर्क दिख रहे हैं। मई 2026 में REC ट्रेडिंग सेशन यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि अप्रैल की गिरावट एक अपवाद थी या एक स्थायी ट्रेंड की शुरुआत। इसका एक्सचेंज के ओवरऑल मार्केट डायनामिक्स और वैल्यूएशन पर असर पड़ेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.