Energy Crisis: कच्चे तेल की कीमतों को थामने के लिए IEA और G7 ने चला बड़ा दांव, रिलीज किए करोड़ों बैरल तेल

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AuthorMehul Desai|Published at:
Energy Crisis: कच्चे तेल की कीमतों को थामने के लिए IEA और G7 ने चला बड़ा दांव, रिलीज किए करोड़ों बैरल तेल

ग्लोबल एनर्जी मार्केट में मची हलचल को देखते हुए International Energy Agency (IEA) ने इमरजेंसी स्टॉक से **325 मिलियन** बैरल तेल रिलीज किया है। इसके साथ ही, G7 देशों ने अगले चार महीनों में अतिरिक्त **100 मिलियन** बैरल तेल की सप्लाई का वादा किया है ताकि डीजल की कमी और सप्लाई चेन की बाधाओं को दूर किया जा सके।

बाजार को राहत देने की कोशिश

International Energy Agency (IEA) ने अपने इमरजेंसी रिजर्व से 325 मिलियन बैरल क्रूड और रिफाइंड प्रोडक्ट्स जारी किए हैं। यह कदम इस साल की शुरुआत में किए गए 400 मिलियन बैरल के वादे का 80% हिस्सा है। इसके अलावा, G7 देशों ने अगले 4 महीनों के लिए 100 मिलियन बैरल अतिरिक्त तेल सप्लाई करने का ऐलान किया है, जिसका मुख्य फोकस डीजल की भारी किल्लत को कम करना है।

क्यों आई यह नौबत?

दुनिया भर में सप्लाई चेन की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव ने तेल की आवाजाही को मुश्किल बना दिया है। वहीं, रूसी रिफाइनरियों पर हुए हमलों ने डीजल की सप्लाई को काफी कम कर दिया है, जिससे इंडस्ट्री और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर दबाव बढ़ गया है। IEA और G7 का यह जॉइंट एक्शन कीमतों को काबू में रखने और महंगाई के दबाव को कम करने के लिए है।

भारतीय निवेशकों के लिए मायने

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए ग्लोबल मार्केट में हलचल का असर सीधे तौर पर भारत की इकोनॉमी और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ता है। क्रूड की कीमतों में गिरावट का मतलब है ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन में सुधार। हालांकि, यह कदम अस्थाई है, इसलिए निवेशकों को ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल रिस्क और रिफाइनरी कैपेसिटी पर नजर रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.