डीप-टेक कंपनी Hylenr ने Texas A&M यूनिवर्सिटी में अपनी 'Lattice Confinement Fusion' टेक्नोलॉजी का फेज-1 वैलीडेशन पूरा कर लिया है। उनके BRT-NiUCS-2 रिएक्टर के स्वतंत्र अध्ययन से थर्मल आउटपुट का डेटा मिला है, जो इस तकनीक को साबित करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, इसे कमर्शियल स्तर पर उतारना अभी भी कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
Hylenr ने एक अहम पड़ाव पार करते हुए Texas A&M यूनिवर्सिटी के 'न्यूक्लियर इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट' के जरिए अपने BRT-NiUCS-2 रिएक्टर का सफल स्वतंत्र वैलीडेशन पूरा किया है। यह कदम कंपनी के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तकनीक को केवल इंटरनल टेस्ट तक सीमित न रखकर बाहर से इसकी पुष्टि कराई गई है।
रिएक्टर तकनीक की स्वतंत्र जांच
इस अध्ययन में रिएक्टर के खास डिजाइन पर फोकस किया गया, जो 'निकल-पैलेडियम' (nickel-palladium) उत्प्रेरक सिस्टम का उपयोग करता है। लैब की सख्त स्थितियों में कई रिएक्टर नमूनों का परीक्षण किया गया ताकि थर्मल आउटपुट और गैस कंपोजिशन का सटीक डेटा निकाला जा सके। इस डेटा को कनाडा में हुई '27th इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन कंडेंस्ड मैटर न्यूक्लियर साइंस' में भी पेश किया गया था, जो संभावित इंडस्ट्रियल पार्टनर्स के साथ विश्वसनीयता बनाने में मदद करेगा।
कमर्शियल स्केलिंग की बड़ी चुनौतियां
भले ही यह एक वैज्ञानिक माइलस्टोन है, लेकिन लैब की सफलता को बड़े पैमाने पर एनर्जी प्रोडक्शन में बदलना अभी भी एक लंबी रेस है। इस क्षेत्र की स्टार्टअप्स के लिए रिस्क काफी ज्यादा है। कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती रिएक्टर को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने और इसकी क्षमता को यूटिलिटी प्रोवाइडर्स की जरूरतों के हिसाब से बढ़ाने की है।
इन्वेस्टर्स इस बात पर बारीक नजर रख रहे हैं कि क्या यह तकनीक कंट्रोल्ड लैब से निकलकर इंडस्ट्रियल-स्केल पर काम कर पाएगी। ऊर्जा क्षेत्र में रिसर्च की भारी लागत और इंजीनियरिंग की पेचीदगियों के कारण, कंपनी के रेवेन्यू तक पहुंचने का सफर लंबा और कठिन रहने वाला है।
