Houthi विद्रोहियों ने सऊदी अरब के सामने एक बड़ी शर्त रखी है। उन्होंने एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोकने के बदले **$51 बिलियन** मुआवजे और राजनीतिक मान्यता की मांग की है। इस तनाव से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और एविएशन शेयरों पर पड़ेगा।
भारत के एनर्जी सेक्टर पर संकट के बादल
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है। सऊदी अरब दुनिया का प्रमुख ऑयल प्रोड्यूसर है, और वहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर Brent Crude की कीमतों पर पड़ता है। यदि तेल के दाम बढ़ते हैं, तो भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जिससे देश में महंगाई और ट्रेड डेफिसिट पर दबाव बढ़ सकता है।
किन शेयरों पर रखें नजर?
इस भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों को Indian Oil Corporation (IOC), Bharat Petroleum (BPCL), और Hindustan Petroleum (HPCL) जैसे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। जब ग्लोबल लेवल पर क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो इन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ सकता है, खासकर यदि वे इस बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर पूरी तरह शिफ्ट नहीं कर पाती हैं। वहीं, ONGC और Oil India जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए यह स्थिति उतार-चढ़ाव वाली साबित हो सकती है।
एविएशन सेक्टर के लिए जोखिम
हूती हमलों का दायरा केवल ऑयल रिफाइनरियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इन्होंने एयरपोर्ट्स और लॉजिस्टिकल हब को भी निशाना बनाया है। एयरलाइंस के लिए यह दोहरी मार है, क्योंकि Aviation Turbine Fuel (ATF) की कीमतें सीधे कच्चे तेल से जुड़ी होती हैं। यदि तनाव बढ़ता है और सप्लाई चेन बाधित होती है, तो एयरलाइंस का ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ेगा, जो उनके मुनाफे पर बुरा असर डाल सकता है।
फिलहाल, रियाद ने इन मांगों पर कोई ठोस रुख नहीं दिखाया है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशकों को आने वाले दिनों में Brent Crude की कीमतों और सऊदी सरकार के आधिकारिक बयानों पर नजर रखनी चाहिए। रेड सी (Red Sea) के रास्तों पर स्थिरता ही यह तय करेगी कि भारत के एनर्जी इंपोर्ट कॉस्ट पर इसका कितना बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
