यमन के शब्वा प्रांत में हुए घातक मिसाइल हमले में **53** लोगों की जान चली गई है। यह हमला Balhaf LNG फैसिलिटी के करीब हुआ, जिससे Red Sea शिपिंग रूट और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
यमन के शब्वा (Shabwa) प्रांत में सोमवार को हुआ मिसाइल हमला भू-राजनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा तनाव लेकर आया है। इस हमले में 53 लोग मारे गए हैं और करीब 200 लोग घायल हुए हैं। यह निशाना Balhaf लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) साइट के पास स्थित मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर को बनाया गया था। Balhaf फैसिलिटी न केवल यमन का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल निवेश है, बल्कि यह एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर का एक अहम केंद्र भी है।
यह इलाका Bab el-Mandeb जलडमरूमध्य के बेहद करीब है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और एनर्जी ट्रांजिट की सबसे महत्वपूर्ण धमनियों में से एक है। भारत के लिए यह स्थिति संवेदनशील है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का काफी कच्चा तेल (Crude Oil) आयात करता है और यूरोप के साथ व्यापार के लिए इसी रूट का इस्तेमाल करता है। इस क्षेत्र में अशांति बढ़ने से माल ढुलाई (Freight) और बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) में इजाफा हो सकता है, जिसका सीधा असर कमोडिटी की कीमतों पर पड़ सकता है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से 'जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम' (Geopolitical Risk Premium) बढ़ता है, क्योंकि सप्लाई चेन की निरंतरता पर अनिश्चितता के बादल छा जाते हैं। फिलहाल, निवेशक अब एनर्जी स्टॉक्स और अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स कंपनियों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। बड़ी चिंता यह है कि क्या हिंसा का यह दौर तेल के टैंकरों की आवाजाही को बाधित करेगा या शिपिंग की लागत को और महंगा कर देगा।
