होरमुज़ संकट: भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर ग्रहण! LNG, LPG पर बड़ा खतरा, कीमतों में भारी उछाल की आशंका

ENERGY
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
होरमुज़ संकट: भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर ग्रहण! LNG, LPG पर बड़ा खतरा, कीमतों में भारी उछाल की आशंका
Overview

होरमुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ रहा है। हालांकि, देश के पास कच्चे तेल (Crude Oil) का पर्याप्त अल्पकालिक भंडार (Short-term Inventory) है, लेकिन इस संकट ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के आयात (Import) को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है, खासकर होरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास। यह वह अहम समुद्री मार्ग है जहाँ से दुनिया की लगभग 20% ऊर्जा सप्लाई गुजरती है, और इसने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे तौर पर चुनौती दी है। अच्छी खबर यह है कि भारत के पास कच्चे तेल (Crude Oil) और ईंधन का 10 से 15 दिन का भंडार रिफाइनरियों में और 5 से 7 दिन का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है, जो तत्काल आपूर्ति बाधित होने की स्थिति से निपटने में सहायक होगा।

हालांकि, यह राहत केवल कच्चे तेल तक सीमित है। असली खतरा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के आयात को लेकर है। भारत अपनी लगभग 60% एलएनजी (LNG) और लगभग पूरे एलपीजी (LPG) की मांग इसी होरमुज़ मार्ग से पूरा करता है। इस महत्वपूर्ण मार्ग के बंद होने का मतलब इन गैसों की आपूर्ति पर सीधा और गंभीर असर पड़ना है।

इस तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी दिखने लगा है। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें हफ्ते के अंत में लगभग $73 प्रति बैरल के स्तर पर रहीं, जो साल की शुरुआत से अब तक लगभग 16% की बढ़ोतरी दर्शाता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर सप्लाई में रुकावट का गंभीर खतरा बना रहा, तो कीमतें $80 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। बढ़ती महंगाई (Inflation) के इस दौर में, यह कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) ला सकता है और बफर स्टॉक को बनाए रखना और महंगा बना सकता है।

संभावित रुकावटों से निपटने के लिए, भारत ने आपातकालीन योजनाएं तैयार की हैं। इसमें रूस जैसे वैकल्पिक, विविध स्रोतों से खरीद बढ़ाना शामिल है। हालांकि, रूस से भारत पहुंचने में मध्य पूर्व की तुलना में एक महीने से अधिक का समय लग सकता है, इसलिए समय पर ऑर्डर देना महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा, रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) में लगभग एक सप्ताह की जरूरत का स्टॉक मौजूद है, जो सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत प्रदान करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में भारत की मध्य पूर्व से कच्चे तेल पर निर्भरता बढ़ी है, जिससे होरमुज़ से जुड़े जोखिम भी बढ़े हैं। जबकि छोटी-मोटी रुकावटें संभव हैं, एक लंबे समय तक चलने वाली पूर्ण नाकाबंदी की संभावना कम मानी जा रही है। ऐसे में, मुख्य चिंता अचानक सप्लाई की कमी के बजाय कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव और व्यापक आर्थिक प्रभाव की है। क्रूड ऑयल के विपरीत, एलएनजी (LNG) के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है। एलएनजी के ज्यादातर वॉल्यूम लंबी अवधि के अनुबंधों (Long-term Contracts) में बंधे हैं, जिससे स्पॉट मार्केट (Spot Market) में आसानी से विकल्प ढूंढना मुश्किल हो जाता है। यदि होरमुज़ मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो भारत के लिए पर्याप्त गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। एलपीजी आयात में भी इसी तरह की बाधाएं आ सकती हैं।

क्षेत्रीय देशों की बात करें तो, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े आयातक भी इसी तरह के जोखिमों का सामना कर रहे हैं, क्योंकि उनकी भी काफी हद तक ऊर्जा सप्लाई होरमुज़ से होकर गुजरती है।

बाजार विश्लेषकों को मध्य पूर्व में लगातार बने रहने वाले भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है। भले ही भारत के लिए भौतिक आपूर्ति की कमी की संभावना कम है, लेकिन कीमतों में अचानक वृद्धि और परिचालन लागत बढ़ने का खतरा बना हुआ है। यह स्थिति भारतीय नीति निर्माताओं के लिए ऊर्जा सुरक्षा को एक प्रमुख फोकस बनाए रखने और क्षेत्रीय स्थिरता की लगातार निगरानी करने की आवश्यकता पर जोर देती है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.