Hindustan Zinc ने कुल बिजली की ज़रूरतों में रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) का इस्तेमाल बढ़ाकर **22%** कर दिया है, जो FY26 में **18%** था। कंपनी का लक्ष्य 2028 तक इसे **70%** तक ले जाने का है। इस दिशा में, उन्होंने Serentica Renewables के साथ **530 MW** का एक बड़ा एग्रीमेंट किया है। हालांकि, इन सबके बीच, 19 अगस्त 2026 को शेयर बाजार की कमजोरी के चलते कंपनी के शेयर **1.20%** गिरकर बंद हुए।
एनर्जी ट्रांज़िशन में बड़ा कदम
भारत के सबसे बड़े जिंक उत्पादकों में से एक, Hindustan Zinc ने अपने एनर्जी ट्रांज़िशन (Energy Transition) में एक अहम पड़ाव हासिल किया है। अब कंपनी की कुल बिजली खपत का 22% रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) से आ रहा है, जो कि फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के करीब 18% से एक सुधार है। कंपनी ने यह वादा किया है कि वे फाइनेंशियल ईयर 2028 (FY28) तक इस आंकड़े को 70% तक पहुंचा देंगे। इसका मुख्य उद्देश्य माइनिंग और स्मेल्टिंग ऑपरेशन्स के लिए एक ज़्यादा टिकाऊ (Sustainable) और लागत-प्रभावी (Cost-effective) बिजली सप्लाई सुनिश्चित करना है।
Serentica Renewables के साथ बढ़ा पार्टनरशिप
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, कंपनी ने Serentica Renewables के साथ अपनी पार्टनरशिप को मज़बूत किया है। राउंड-द-क्लॉक रिन्यूएबल पावर सप्लाई का यह एग्रीमेंट 450 MW से बढ़ाकर 530 MW कर दिया गया है। यह विस्तार कंपनी की पारंपरिक, ग्रिड-आधारित बिजली पर निर्भरता कम करने की स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा है, जो अक्सर कीमतों में उतार-चढ़ाव का शिकार हो सकती है। बिजली खरीदने के अलावा, कंपनी अपने इंफ्रास्ट्रक्चर में भी निवेश कर रही है। FY26 में कंपनी ने 892 मिलियन यूनिट ग्रीन पावर जेनरेट की, जबकि FY25 में यह आंकड़ा 632 मिलियन यूनिट था।
लीडरशिप और फाइनेंशियल मजबूती
इस क्लीन एनर्जी शिफ्ट का नेतृत्व CEO और होल-टाइम डायरेक्टर अमरेन्द्र प्रकाश (Amarendu Prakash) कर रहे हैं, जिन्होंने 1 अगस्त 2026 को पदभार संभाला। कंपनी की मजबूत फाइनेंशियल पोजीशन (Financial Position) इन ट्रांज़िशन के लिए फंडिग (Funding) में मदद कर रही है। फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) की पहली तिमाही में, Hindustan Zinc ने ₹5,469 करोड़ का रिकॉर्ड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 145% ज़्यादा है। इसी दौरान रेवेन्यू (Revenue) ₹13,747 करोड़ तक पहुंच गया। यह मजबूत कैश फ्लो (Cash Flow) रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी पूंजी निवेश (Capital Investment) के लिए ज़रूरी है।
निवेशक इन जोखिमों पर रखें नज़र
जहां कंपनी डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonization) पर फोकस कर रही है, वहीं निवेशकों को कुछ बिज़नेस रिस्क (Business Risks) पर भी ध्यान देना चाहिए। किसी भी माइनिंग कंपनी के लिए सबसे बड़ा जोखिम ग्लोबल कमोडिटी (Commodity) की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का है, जो एनर्जी एफिशिएंसी (Energy Efficiency) के बावजूद प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) पर असर डाल सकता है। इसके अलावा, एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) भी है, क्योंकि राजस्थान और उत्तराखंड जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स (Renewable Energy Projects) को स्थापित करने के लिए जटिल प्लानिंग, रेगुलेटरी अप्रूवल (Regulatory Approval) और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर (Transmission Infrastructure) के समय पर कमीशनिंग की ज़रूरत होती है। ग्रीन कैपेसिटी (Green Capacity) स्थापित करने में किसी भी तरह की देरी से कंपनी के 2028 के लक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं।
स्टॉक मार्केट का हाल
शेयर बाजार की बात करें तो, 19 अगस्त 2026 को कंपनी का शेयर ₹551.30 पर बंद हुआ, जो 1.20% की गिरावट दर्शाता है। यह मूवमेंट ग्रीन एनर्जी की घोषणा पर किसी खास प्रतिक्रिया के बजाय व्यापक बाजार के रुझानों को दर्शाता है। भविष्य में, शेयरधारकों के लिए मुख्य निगरानी बिंदु नए रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स की कमीशनिंग टाइमलाइन (Commissioning Timelines), बिजली बिलों पर वास्तविक लागत बचत और ग्लोबल जिंक कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद मार्जिन बनाए रखने की कंपनी की क्षमता होंगे।
