भारत का एनर्जी मिक्स लक्ष्य फिसड्डी? गैस इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, टैक्स है असली रोड़ा!

ENERGY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
भारत का एनर्जी मिक्स लक्ष्य फिसड्डी? गैस इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, टैक्स है असली रोड़ा!

GAIL के पूर्व प्रमुख संदीप कुमार गुप्ता ने कहा है कि भारत में नेचुरल गैस की ग्रोथ इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से नहीं, बल्कि भारी टैक्सेशन के कारण रुकी हुई है। इंपोर्ट टर्मिनल्स और पाइपलाइनें आधी क्षमता पर चल रही हैं, और गैस को GST से बाहर रखना व एक्साइज ड्यूटी को हाई रखना एनर्जी मिक्स को 15% तक पहुंचाने में बड़ी बाधाएं हैं।

गैस इंफ्रास्ट्रक्चर का सही हाल

भारत का एनर्जी बास्केट में नेचुरल गैस का हिस्सा लगभग 6% से बढ़ाकर 15% करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहा है। GAIL और Mahanagar Gas (MGL) के पूर्व चेयरमैन संदीप कुमार गुप्ता के अनुसार, आम धारणा के विपरीत, समस्या पाइपलाइन या इंपोर्ट सुविधाओं की कमी नहीं है, बल्कि मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का कम इस्तेमाल है।

आंकड़े बताते हैं कि भारत के मौजूदा LNG इंपोर्ट टर्मिनल्स अपनी कुल क्षमता के लगभग 50% पर ही काम कर रहे हैं। इसी तरह, गैस पाइपलाइन नेटवर्क भी अपनी क्षमता के केवल 50% से 60% तक ही इस्तेमाल हो पा रहे हैं। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क 307 भौगोलिक क्षेत्रों में फैलने के बावजूद, अपेक्षित खपत में वृद्धि नहीं देखी गई है। यह दिखाता है कि समस्या फिजिकल एसेट्स की कमी नहीं, बल्कि अंतिम उपभोक्ता के लिए ईंधन की लागत है।

टैक्सेशन का गेम

इस क्षेत्र की मुख्य समस्या नेचुरल गैस से जुड़ा जटिल टैक्स स्ट्रक्चर है। चूंकि नेचुरल गैस गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के दायरे से बाहर है, इसलिए बिज़नेस इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं कर पा रहे हैं। इससे सप्लाई चेन में लागत बढ़ जाती है। इसके अलावा, क्लीनर फ्यूल्स के लिए टैक्स का भारी बोझ है। CNG वाहनों पर 28% GST है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स काफी कम है। CNG पर 14% एक्साइज ड्यूटी भी इसे अन्य एनर्जी विकल्पों की तुलना में कम प्रतिस्पर्धी बनाती है। GST में एकीकरण या टैक्स में तर्कसंगतता के बिना, ये लागतें डिमांड ग्रोथ को प्रभावित करती रहेंगी।

एनर्जी ट्रांजिशन पर असर

सरकार का 15% गैस-आधारित एनर्जी मिक्स का लक्ष्य मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि डिमांड कम बनी हुई है। ICICI सिक्योरिटीज के एनालिस्ट प्रोबल सेन जैसे विशेषज्ञ CNG को अगले दशक के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांजिशन फ्यूल मानते हैं, लेकिन इसकी स्वीकार्यता कीमत पर निर्भर करती है। GAIL, Indraprastha Gas और Mahanagar Gas जैसे सेक्टर के प्रमुख खिलाड़ी इस बात पर नज़र रखेंगे कि क्या सरकार नेचुरल गैस को GST के दायरे में लाने जैसे नीतिगत बदलाव करती है। इन कंपनियों की वॉल्यूम ग्रोथ सरकार द्वारा टैक्स-आधारित मूल्य अंतर को संबोधित करने की इच्छा पर काफी हद तक निर्भर करेगी।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.