ऊर्जा सुरक्षा बनी मुख्य वजह
Hero Future Energies के चेयरमैन राहुल मुंजाल (Rahul Munjal) ने बताया कि दुनिया भर में बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए, कंपनी ग्रीन हाइड्रोजन को न केवल जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से लड़ने के एक हथियार के तौर पर देख रही है, बल्कि इसे एक ऐसे सेक्टर के रूप में भी पहचान रही है जहाँ भविष्य में बेहतर मुनाफ़ा (Profit) कमाया जा सकता है।
'टेरावॉट' स्केल की ज़रूरत
मुंजाल के अनुसार, भारत की तेज़ी से बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए उद्योग को 'गीगावॉट' (Gigawatt) से आगे बढ़कर 'टेरावॉट' (Terawatt) स्केल पर काम करना होगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत अपनी ऊर्जा खपत का लगभग 88-91% आयातित कच्चे तेल (Crude Oil) से पूरा करता है, जिससे देश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के उतार-चढ़ाव और कीमतों में तेज़ी के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
ग्रीन हाइड्रोजन: ऊँचे मार्जिन का नया ज़रिया
2012 में स्थापित और KKR जैसे बड़े निवेशकों का समर्थन प्राप्त Hero Future Energies (HFE) अब अपनी ऊर्जा विंड (Wind) और सोलर (Solar) पावर से ग्रीन हाइड्रोजन की ओर मोड़ रही है। कंपनी का मानना है कि विंड और सोलर जेनरेशन का क्षेत्र 'कमोडिटी' (Commodity) बनता जा रहा है, जहाँ प्रतिस्पर्धा बहुत ज़्यादा है और मार्जिन कम। इसलिए, HFE अब ऊँचे मार्जिन और ग्रोथ वाले ग्रीन हाइड्रोजन पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है।
भारत सरकार ने जनवरी 2023 में 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' (National Green Hydrogen Mission) की शुरुआत की है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है। अनुमान है कि भारतीय ग्रीन हाइड्रोजन मार्केट 2025 तक $6.5 बिलियन से बढ़कर 2034 तक $35 बिलियन तक पहुँच सकता है। HFE ने Ohmium International के साथ मिलकर 1000 MW की उत्पादन क्षमता के लिए साझेदारी की है, जो इसे इस उभरते बाज़ार में एक 'अर्ली मूवर' (Early Mover) बनाती है।
चुनौतियाँ और सरकारी समर्थन
Adani Green Energy और ReNew Energy जैसी अन्य प्रमुख रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियाँ भी इस क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। HFE, जो कि एक प्राइवेट कंपनी है, ने सितंबर 2022 में KKR से $450 मिलियन का निवेश हासिल किया था, जिससे कंपनी का मूल्यांकन $1 बिलियन से ज़्यादा हो गया था।
हालांकि, ग्रीन हाइड्रोजन के विस्तार में कुछ बाधाएं हैं। इसकी उत्पादन लागत (Production Cost) अभी ज़्यादा है, हालांकि यह $2.4 प्रति किलोग्राम (2030 तक) तक घटने का अनुमान है। इसके अलावा, ग्रीन हाइड्रोजन के परिवहन (Transport) के लिए ख़ास इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) की ज़रूरत होती है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए, भारतीय सरकार वित्तीय प्रोत्साहन (Financial Incentives) और छूट (Waivers) जैसे ज़रूरी पॉलिसी सपोर्ट दे रही है।
संभावित जोखिम
इन सबके बावजूद, कुछ महत्वपूर्ण जोखिम भी बने हुए हैं। ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन अभी भी महंगा है और इसके लॉजिस्टिक्स (Logistics) में भी जटिलताएं हैं। HFE की 2030 तक 30 GW क्षमता हासिल करने के लिए $20 बिलियन के महत्वाकांक्षी निवेश की योजनाएं, कर्ज (Debt) और इक्विटी (Equity) फाइनेंसिंग की उपलब्धता पर निर्भर करेंगी, जो अस्थिर हो सकती हैं। Adani Green Energy और Tata Power जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा भी एक अहम चुनौती है।
