हरियाणा सरकार ने गुड़गांव में Eleven Power Private Limited को मिले पावर डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस को मंजूरी के महज एक हफ्ते के भीतर सस्पेंड कर दिया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला मौजूदा सरकारी यूटिलिटीज के रेवेन्यू और इन्फ्रास्ट्रक्चर को बचाने के लिए लिया गया है।
सरकारी दखल और लाइसेंस पर रोक
हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (HERC) ने गुड़गांव और नूंह में प्राइवेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन की एंट्री पर ब्रेक लगा दिया है। 28 अक्टूबर को आए इस फैसले के जरिए Eleven Power Private Limited के लाइसेंस को सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई 26 अक्टूबर को राज्य सरकार द्वारा दिए गए एक विशेष निर्देश के बाद की गई है, जिससे कंपनी के ऑपरेशंस फिलहाल ठंडे बस्ते में चले गए हैं।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
राज्य सरकार का मुख्य तर्क मौजूदा सरकारी डिस्ट्रीब्यूशन इन्फ्रास्ट्रक्चर की वित्तीय स्थिरता को सुरक्षित रखना है। अधिकारियों को डर था कि अगर कोई दूसरा लाइसेंसधारी बाजार में आता है, तो वह 'चेरी-पिकिंग' (चुनिंदा ग्राहकों को चुनना) शुरू कर देगा। इसमें नई कंपनी केवल बड़े औद्योगिक और कमर्शियल ग्राहकों पर फोकस करती, जिससे सरकारी यूटिलिटीज पर कम रेवेन्यू वाले रेजिडेंशियल और एग्रीकल्चरल ग्राहकों का बोझ बढ़ जाता।
सरकार का मानना है कि इस तरह के बदलाव से क्रॉस-सब्सिडी मॉडल बिगड़ सकता है, जो छोटे उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मुहैया कराने के लिए जरूरी है। इसके अलावा, अचानक हुए इस बदलाव से लंबे समय के पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPA) भी प्रभावित हो सकते थे।
आगे की राह और निवेशकों के लिए सीख
दिलचस्प बात यह है कि Eleven Power को 19 अक्टूबर को ही 25 साल का डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस मिला था। कंपनी ने इसे चुनौती देने या सुनवाई की मांग की थी, जिसे रेगुलेटरी बॉडी ने खारिज कर दिया। इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 108(1) का हवाला देते हुए कहा गया कि सरकारी हस्तक्षेप के बाद अब किसी और कानूनी कार्यवाही की जरूरत नहीं है।
यह घटनाक्रम भारतीय पावर सेक्टर में काम कर रही कंपनियों के लिए एक बड़ा 'Regulatory Risk' पेश करता है। भले ही कानून में मल्टीपल लाइसेंसिंग का प्रावधान हो, लेकिन राज्य स्तर के नीतिगत फैसले कभी भी प्राइवेट ऑपरेटर्स के लिए तस्वीर बदल सकते हैं।
