हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की बड़ी हड़ताल से पूरे राज्य में हाहाकार मचा है। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे प्रमुख इंडस्ट्रियल हब में उत्पादन पूरी तरह रुक गया है। कर्मचारी 'Eleven Power' को दिए गए **25 साल** के निजी लाइसेंस का विरोध कर रहे हैं, जिसके बाद सरकार अब अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal for Electricity) का रुख कर रही है।
हरियाणा में बिजली विभाग के करीब 40,000 कर्मचारियों की 3 दिवसीय हड़ताल ने औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों में बिजली संकट खड़ा कर दिया है। 24 अक्टूबर तक चलने वाली इस हड़ताल से मैन्युफैक्चरिंग हब में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे पानी की सप्लाई और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी असर पड़ा है।
निजी लाइसेंस पर विवाद
विवाद की मुख्य वजह हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (Haryana Electricity Regulatory Commission) का वह फैसला है, जिसमें 'Eleven Power' को 25 साल का पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस दिया गया है। यूनियन नेताओं का मानना है कि इससे न सिर्फ सरकारी कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडराएगा, बल्कि 'Dakshin Haryana Bijli Vitran Nigam' जैसे सरकारी निकायों की आर्थिक सेहत भी बिगड़ जाएगी। उनका डर है कि निजी कंपनियां केवल मुनाफे वाले शहरी इलाकों पर ध्यान देंगी, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान होगा।
इंडस्ट्री पर गहरा असर
गुरुग्राम और फरीदाबाद भारत के मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट के लिए महत्वपूर्ण केंद्र हैं। अचानक बिजली कटने से कंपनियों की प्रोडक्शन लाइन ठप हो गई है। जानकारों का कहना है कि अगर यह स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो सप्लाई चेन में बाधा आने के साथ ही कंपनियों की लागत में भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
सरकार का क्या है रुख?
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने स्पष्ट किया है कि सरकार इस फैसले को अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal for Electricity) में चुनौती देगी। सरकार का प्रयास है कि लाइसेंस पर तुरंत स्टे (Stay) लगाकर ग्रिड की स्थिरता बहाल की जाए। फिलहाल रेवाड़ी जैसे कई इलाकों में जनता में भारी आक्रोश है और विपक्ष लगातार सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है। निवेशकों की नजर अब इस कानूनी लड़ाई पर टिकी है कि कोर्ट इस प्राइवेट डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस पर क्या फैसला सुनाता है।
