पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने साफ किया है कि ग्लोबल मार्केट में तेल के ऊंचे दाम सप्लाई की कमी से नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स और बढ़ते फ्रेट खर्चों के कारण हैं। भारत ने जोखिम कम करने के लिए अपने आयात स्रोतों का विस्तार किया है, लेकिन निजी फ्यूल रिटेलर्स जैसे Reliance और Nayara Energy पर मार्जिन का भारी दबाव बना हुआ है।
पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में मौजूदा उतार-चढ़ाव के पीछे सप्लाई का संकट नहीं, बल्कि लॉजिस्टिकल चुनौतियां हैं। मंत्री के अनुसार, वैश्विक स्तर पर तेल का उत्पादन लगभग 104 मिलियन बैरल प्रतिदिन है, जबकि खपत 94 मिलियन बैरल प्रतिदिन के आसपास है। इसका मतलब है कि बाजार में तेल की कोई कमी नहीं है, लेकिन उपभोक्ताओं तक इसे पहुंचाने की लागत काफी बढ़ गई है।
क्यों बढ़ रही है कीमत?
कीमतों पर दबाव का मुख्य कारण बाधित ट्रेड रूट्स हैं। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता, विशेष रूप से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) और 'रेड सी' (Red Sea) जैसे ट्रांजिट पॉइंट्स पर आए संकट के कारण माल ढुलाई का खर्च (Freight charges) बढ़ गया है। यह बढ़ा हुआ खर्च कच्चे तेल की अंतिम कीमत में जुड़ रहा है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
भारत की रणनीति
बाहरी झटकों से घरेलू बाजार को सुरक्षित रखने के लिए भारत ने अपनी सोर्सिंग को तेजी से डायवर्सिफाई किया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने कच्चे तेल की खरीद का नेटवर्क 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक पहुंचा दिया है, ताकि किसी एक क्षेत्र में तनाव का असर देश की सप्लाई पर न पड़े।
निजी फ्यूल रिटेलर्स पर मार
जहां एक तरफ भारत सप्लाई सुनिश्चित करने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू रिटेल फ्यूल कीमतें स्थिर रहने के कारण Reliance और Nayara Energy जैसी निजी कंपनियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर न डाल पाने की वजह से कुछ आउटलेट्स पर फ्यूल राशनिंग (Fuel Rationing) की खबरें भी सामने आ रही हैं। निवेशकों के लिए इन लॉजिस्टिकल बाधाओं की अवधि और घरेलू कीमतों पर सरकार की आगामी नीति पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
