ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में स्टार्टअप HYDGEN ने मंगलुरु में **20 MW** क्षमता वाला इलेक्ट्रोलाइज़र प्लांट शुरू किया है। कंपनी अब PEM और AEM सिस्टम का उत्पादन करेगी, लेकिन बड़ी कंपनियों से मुकाबला इसके लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
ग्रीन हाइड्रोजन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए स्टार्टअप HYDGEN ने मंगलुरु में अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शुरू कर दिया है। 20 MW की वार्षिक क्षमता वाले इस प्लांट में इलेक्ट्रोलाइज़र सिस्टम बनाए जाएंगे, जो पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन अलग करने में अहम भूमिका निभाते हैं। कंपनी का फोकस फिलहाल Proton Exchange Membrane (PEM) और Anion Exchange Membrane (AEM) इकाइयों पर है, जिसमें 250 kW का एक खास सिस्टम भी शामिल है जो इंडस्ट्रियल जरूरतों को पूरा करेगा।
सरकार की मिशन में हिस्सेदारी
यह कदम भारत के 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के लक्ष्य को मजबूती देता है। स्थानीय स्तर पर इन मशीनों को बनाने से न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि डोमेस्टिक इंडस्ट्रीज के लिए ग्रीन हाइड्रोजन की लागत भी कम होगी।
बड़े प्लेयर्स से मुकाबला
निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह सेक्टर अभी शुरुआती दौर में है। हालांकि 20 MW की क्षमता एक स्टार्टअप के लिए अच्छी शुरुआत है, लेकिन Reliance, Adani, L&T और Ohmium जैसे दिग्गज खिलाड़ी पहले से ही गीगावाट-स्केल की योजनाएं लेकर बाजार में मौजूद हैं। HYDGEN के लिए इन बड़े और साधन संपन्न प्लेयर्स के सामने अपनी लागत को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
SIGHT स्कीम और भविष्य की राह
कंपनी की आर्थिक स्थिरता काफी हद तक सरकारी 'Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition' (SIGHT) स्कीम पर निर्भर करेगी। इस योजना के तहत मिलने वाले इंसेंटिव्स कंपनी के कैश फ्लो और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी हैं। निवेशकों को अब कंपनी के ऑर्डर बुक और स्टील, सीमेंट और फर्टिलाइजर जैसे क्षेत्रों से मिलने वाले नए कॉन्ट्रैक्ट्स पर बारीक नजर रखनी चाहिए।
