Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) अब क्रूड ऑयल इम्पोर्ट के लिए 'डिलिवर्ड' (delivered) बेसिस मॉडल अपना रही है। इस बदलाव का मकसद शिपिंग की आसमान छूती कीमतों को कंट्रोल करना और कंपनी के रिफाइनिंग मार्जिन को सुरक्षित रखना है। साथ ही, कंपनी की राजस्थान रिफाइनरी जल्द ही अपनी पूरी कैपेसिटी पर काम करने के लिए तैयार है।
बढ़ती शिपिंग लागत और ग्लोबल अस्थिरता को देखते हुए Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) ने अपनी स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव किया है। अब कंपनी कच्चे तेल की खरीद के लिए खुद जहाज किराए पर लेने के बजाय 'डिलिवर्ड' (delivered) बेसिस पर तेल खरीदेगी। इसका सीधा मतलब है कि अब तेल की डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स की जिम्मेदारी सप्लायर की होगी, जिससे कंपनी पर शिपिंग के बढ़ते दबाव को कम किया जा सके।
क्यों लिया गया यह फैसला?
मौजूदा समय में बड़े ऑयल टैंकरों का किराया $9 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है, जो पिछली तिमाही के $3 से $4 प्रति बैरल के मुकाबले काफी ज्यादा है। इस कदम से HPCL शिपिंग रूट और इंश्योरेंस से जुड़े जोखिमों को कम करना चाहती है। साथ ही, कई बार ऑयल प्रोड्यूसर्स अपना माल निकालने के लिए फ्रेट डिस्काउंट भी देते हैं, जिसका सीधा फायदा कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को मिल सकता है।
राजस्थान रिफाइनरी का अपडेट
कंपनी का फोकस अब अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ाने पर भी है। राजस्थान रिफाइनरी, जिसकी क्षमता 1,80,000 बैरल प्रतिदिन है, अभी अपनी क्षमता के 60% पर काम कर रही है। मैनेजमेंट के अनुसार, दिसंबर तक यहां हाई-सल्फर फ्यूल ऑयल का उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। पूरी रिफाइनरी के दिसंबर के अंत या जनवरी की शुरुआत तक पूरी तरह चालू होने का लक्ष्य रखा गया है।
निवेशकों के लिए अहम
आने वाले समय में निवेशकों की नजरें मुख्य रूप से दो बातों पर होंगी: पहला, राजस्थान रिफाइनरी का फुल कैपेसिटी पर पहुंचना और दूसरा, इस नई प्रोक्योरमेंट स्ट्रैटेजी का कंपनी के ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) पर क्या असर पड़ता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बदलाव कंपनी को ग्लोबल फ्रेट की बढ़ती कीमतों से बचा पाने में सफल होता है या नहीं।
