रिफाइनिंग से बंपर कमाई, मार्जिन में रिकॉर्ड उछाल
HPCL के लिए Q4 FY26 शानदार साबित हुआ। कंपनी का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) पिछले तिमाही के $5.4 प्रति बैरल से बढ़कर $14.3 प्रति बैरल हो गया। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 की बात करें तो, HPCL ने औसतन $8.79 प्रति बैरल का GRM दर्ज किया, जो FY25 के $5.74 प्रति बैरल से काफी ज्यादा है।
इस दमदार रिफाइनिंग प्रदर्शन का सीधा असर कंपनी की कमाई पर दिखा। Q4 FY26 में कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 46% बढ़कर ₹4,902 करोड़ हो गया, जबकि कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 78% उछलकर ₹6,065 करोड़ पर पहुंच गया। पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए, स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 133% की तेजी के साथ ₹17,175 करोड़ रहा, और कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 168% बढ़कर ₹18,047 करोड़ दर्ज किया गया। EBITDA में भी 83.6% का इजाफा हुआ, जो ₹304.9 बिलियन तक पहुंच गया। इन बेहतरीन नतीजों के बाद 13 मई 2026 को HPCL के शेयर में जोरदार तेजी देखी गई।
मार्केटिंग में भारी नुकसान का सिलसिला जारी
जहां एक ओर रिफाइनिंग से कंपनी मालामाल हो रही है, वहीं दूसरी ओर HPCL और अन्य इंडियन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए मोटर स्पिरिट (MS) और हाई-स्पीड डीजल (HSD) पर मार्केटिंग मार्जिन का संकट बना हुआ है। पिछले 4 साल से पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें स्थिर हैं, लेकिन मिडिल ईस्ट में टेंशन के चलते ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इस प्राइसिंग फ्रीज के कारण OMCs को रोजाना ₹1,000 करोड़ से ₹1,200 करोड़ का भारी नुकसान हो रहा है। 2026 की पहली तिमाही तक पेट्रोल-डीजल पर अंडर-रिकवरी ₹2 लाख करोड़ के करीब पहुंच चुकी है।
इस बढ़ते घाटे को कम करने के लिए, OMCs ने 16 मार्च 2026 से रिफाइनरियों के लिए डिस्काउंटेड रेट्स लागू किए हैं, जो रिवाइज्ड रिफाइनरी ट्रांसफर प्राइस (RTP) मैकेनिज्म के तहत है। यह पॉलिसी अकेले रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचा सकती है और ओवरऑल प्रॉफिटेबिलिटी में जटिलता बढ़ा सकती है। हालांकि, FY26 में HPCL को LPG अंडर-रिकवरी के लिए ₹3,300 करोड़ का मुआवजा मिला, लेकिन 31 मार्च 2026 तक LPG सिलेंडरों पर कुल अंडर-रिकवरी ₹12,798.67 करोड़ थी।
ऑपरेशनल और फाइनेंशियल हेल्थ
ऑपरेशनल मोर्चे पर, FY26 में HPCL की रिफाइनरियों ने 26.04 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) का रिकॉर्ड क्रूड थ्रूपुट हासिल किया, जो पिछले साल की तुलना में 3% ज्यादा है। Q4 FY26 में तिमाही थ्रूपुट 6.4 MMT रहा। सेल्स वॉल्यूम की बात करें तो Q4 FY26 में 13.0 MMT रहा।
फाइनेंशियल स्थिति मजबूत हुई है, कंपनी का डेट-इक्विटी रेशियो FY26 में घटकर 0.80 हो गया, जो FY25 में 1.38 था। वहीं, इसकी प्रतिद्वंद्वी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) लगभग डेट-फ्री है।
मार्केटिंग दबाव और एनालिस्ट की राय
रिटेल फ्यूल प्राइस के फ्रीज रहने का दबाव HPCL और दूसरी कंपनियों पर बना हुआ है। मिडिल ईस्ट के संघर्षों से कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता आयात लागत और सप्लाई चेन जोखिमों को बढ़ा रही है। रिफाइनरियों के लिए डिस्काउंटेड RTP पॉलिसी जरूरी है, पर यह वैल्यू चेन में जटिलताएं पैदा कर रही है।
टेक्निकल इंडिकेटर्स में कमजोरी के संकेत मिले हैं। MarketsMojo ने हाल ही में HPCL की रेटिंग को 'Hold' कर दिया है। हालांकि, कुछ ब्रोकरेज हाउस 'Buy' रेटिंग बनाए हुए हैं, लेकिन औसतन 12 महीने का टारगेट प्राइस मौजूदा स्तरों से सीमित बढ़त का संकेत दे रहा है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (लगभग ₹79,000-₹83,000 करोड़) बड़ी कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) से कम है।
विश्लेषकों का नजरिया
मार्केटिंग मार्जिन की चिंताओं के बावजूद, विश्लेषक रिफाइनिंग स्ट्रेंथ को लेकर सतर्कता के साथ आशावादी हैं। प्रभुदास लीलाधर ने ₹427 के टारगेट प्राइस के साथ 'Accumulate' रेटिंग दी है। मोतीलाल ओसवाल ने ₹455 पर 'Buy' कॉल बनाए रखा है, और एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने ₹679 का टारगेट सेट किया है। 31 विश्लेषकों द्वारा दिया गया औसत प्राइस टारगेट ₹439.45 है, जो मौजूदा भावों से 12% से अधिक की संभावित बढ़त का संकेत देता है।
HPCL के वैल्यूएशन मल्टीपल्स कम हैं, जिसका P/E रेश्यो मई 2026 तक करीब 5.3x-5.6x है। IOCL और BPCL भी लगभग ऐसे ही मल्टीपल्स पर ट्रेड कर रहे हैं (P/E 5.2x से 5.9x)। यह दर्शाता है कि सेक्टर को निवेशकों द्वारा रूढ़िवादी रूप से वैल्यू किया जा रहा है। कंपनी का प्राइस-टू-बुक (P/B) वैल्यू भी कम है।
