Hindustan Petroleum (HPCL) ने अपने EV चार्जिंग नेटवर्क को बढ़ाकर 5,826 यूनिट्स तक पहुंचा दिया है, जो भारत के पब्लिक चार्जिंग मार्केट का 11% हिस्सा है। अब कंपनी अपना पूरा फोकस हैवी-ड्यूटी कमर्शियल ट्रांसपोर्ट और हाईवे कॉरिडोर पर शिफ्ट कर रही है।
Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) तेजी से अपने रिटेल फ्यूल आउटलेट्स को 'मल्टी-एनर्जी हब' में बदल रही है। कंपनी का उद्देश्य भारत के बदलते ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में अपनी धाक जमाए रखना है। अब तक कंपनी ने 5,826 ऑपरेशनल चार्जिंग फैसिलिटीज स्थापित कर ली हैं, जो देश के पब्लिक EV चार्जिंग मार्केट का 11% हिस्सा कवर करती हैं।
कमर्शियल ट्रांसपोर्ट पर फोकस
कंपनी का नया मास्टर प्लान कमर्शियल लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर टिका है। HPCL ने 50 प्रमुख हाईवे कॉरिडोर पर 240-kW के अल्ट्रा-फास्ट चार्जर्स लगाने की योजना बनाई है। यह कदम इंटर-सिटी बस रूट और लंबी दूरी के ट्रकों को टारगेट करने के लिए उठाया गया है। कंपनी का मानना है कि पैसेंजर कारों के मुकाबले कमर्शियल सेक्टर में तेज टर्नअराउंड की जरूरत होती है, और यहीं कंपनी 'प्राइमरी एनर्जी पार्टनर' बनने का मौका देख रही है।
इस इन्फ्रास्ट्रक्चर को खड़ा करने के लिए HPCL ने Energy In Motion और Mahindra जैसी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की है। बैटरी स्वैपिंग और अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग जैसी तकनीकों को अपने मौजूदा 24,400 से ज्यादा फ्यूल आउटलेट्स में इंटीग्रेट करके कंपनी अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) को कंट्रोल रखने की कोशिश कर रही है।
फाइनेंशियल सेहत और रिस्क
निवेशकों के लिए कंपनी के फाइनेंशियल नंबरों पर नजर रखना जरूरी है। जहां फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कंपनी ने ₹18,047 करोड़ (₹180.47 बिलियन) का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था, वहीं FY2027 की पहली तिमाही में कंपनी को ₹11,526.41 करोड़ का नेट लॉस झेलना पड़ा। यह उतार-चढ़ाव पेट्रोल और डीजल पर कम होते मार्केटिंग मार्जिन के रिस्क को दर्शाता है।
फिलहाल मैनेजमेंट का टारगेट अपने डेट-टू-इक्विटी रेशियो को मौजूदा 1.5x से घटाकर अगले तीन सालों में 0.8x पर लाना है। कंपनी की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने EV प्रोजेक्ट्स में निवेश और ऑपरेशनल कैश फ्लो के बीच कैसे संतुलन बनाती है। निवेशकों को कंपनी के आने वाले क्वार्टरली नतीजों में कर्ज कम करने की गति और चार्जिंग हब के यूटिलाइजेशन लेवल पर खास नजर रखनी चाहिए।
