Gulf Oil Exports: सप्लाई में सुधार, पर Suez Canal को हुआ **$20 बिलियन** का नुकसान

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Gulf Oil Exports: सप्लाई में सुधार, पर Suez Canal को हुआ **$20 बिलियन** का नुकसान

गल्फ देशों से तेल का निर्यात फिर से बढ़कर **21.8 मिलियन** बैरल प्रतिदिन के स्तर पर पहुंच गया है, जिससे सप्लाई को लेकर चिंता कम हुई है। हालांकि, Red Sea में तनाव के कारण Suez Canal को अब तक **$20 बिलियन** का राजस्व नुकसान उठाना पड़ा है।

गल्फ देशों से कच्चे तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स का निर्यात अब 21.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन के स्तर पर पहुंच गया है, जो युद्ध से पहले के 23.3 मिलियन बैरल के आंकड़े के काफी करीब है। इस सुधार के पीछे कंपनियों द्वारा अपनाए गए वैकल्पिक रूट और सुरक्षा उपाय हैं, जिनमें East-West पाइपलाइन और Hormuz जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना की निगरानी शामिल है।

भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?

हालांकि तेल की सप्लाई सुचारू हो रही है, लेकिन वैकल्पिक रास्तों के इस्तेमाल से लॉजिस्टिक और इंश्योरेंस का खर्च बढ़ गया है। भारत, जो कि दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है, के लिए यह स्थिति चिंता का विषय हो सकती है। लॉजिस्टिक लागत में बढ़ोतरी से देश का ऑयल इम्पोर्ट बिल बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर फ्यूल कीमतों और तेल मार्केटिंग कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है।

Suez Canal पर आर्थिक चोट

क्षेत्रीय संघर्ष का असर ट्रेड रूट्स पर गहरा है। Egypt ने पुष्टि की है कि अक्टूबर 2023 से अब तक Suez Canal को $20 बिलियन का रेवेन्यू लॉस हुआ है। रेड सी में सुरक्षा चिंताओं के कारण बड़े शिपिंग जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल मार्केट सप्लाई बहाली और अनिश्चितता के बीच संतुलन बनाए हुए है। Brent crude अभी $96-$98 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। निवेशकों को US-Iran के बीच बातचीत और समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर कड़ी नजर रखनी होगी, क्योंकि कोई भी भू-राजनीतिक तनाव सीधे तौर पर एनर्जी स्टॉक्स में भारी उतार-चढ़ाव ला सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.