गुजरात में कोयले की भारी किल्लत और बिजली की बढ़ती मांग के चलते इंडस्ट्रीज पर शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक बिजली पाबंदियां लगा दी गई हैं, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कामकाज प्रभावित हो सकता है।
गुजरात में बिजली संकट गहराता जा रहा है। उत्तर गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (Uttar Gujarat Vij Company Ltd) ने इंडस्ट्रीज को निर्देश दिया है कि वे पीक आवर्स के दौरान अपनी बिजली खपत को सीमित रखें। यह फैसला राज्य के पावर ग्रिड पर बढ़ते दबाव को देखते हुए लिया गया है।
निवेशकों के लिए जोखिम (Investor Concern)
गुजरात भारत का मैन्युफैक्चरिंग हब है। केमिकल, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर, जिन्हें लगातार बिजली की जरूरत होती है, वे इस पाबंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। अगर कंपनियों को रात के समय डीजल जेनरेटर का इस्तेमाल करना पड़ता है, तो इससे उनका ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ सकता है और सीधा असर नेट प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है।
नेशनल लेवल की चुनौती
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के आंकड़ों के अनुसार, यह समस्या सिर्फ गुजरात तक सीमित नहीं है। पूरे देश में कई थर्मल पावर प्लांट कोयले की कमी से जूझ रहे हैं। गर्मी के मौसम में सिंचाई और अन्य जरूरतों के कारण बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर है, जिससे ग्रिड पर भारी दबाव है। वर्तमान में हमारे पास बड़े स्तर पर बैटरी स्टोरेज की सुविधा भी नहीं है, जो दिन में बनने वाली सोलर एनर्जी को पीक आवर्स के लिए बचाकर रख सके।
अब आगे क्या?
निवेशकों को अब उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जिनका प्लांट गुजरात में है। मैनेजमेंट की कमेंट्री में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कंपनियां अपने प्रोडक्शन शेड्यूल को बदलकर इसे मैनेज कर सकती हैं, या उन्हें लागत बढ़ने का सामना करना पड़ेगा।
