गुजरात एनर्जी के शेयरों में **17 जून** के बाद से करीब **25%** की भारी गिरावट आई है। वेस्ट एशिया में सीजफायर और GTL Transmission के डीमर्जर (Demerger) के बाद से शेयर दबाव में हैं। कंपनी अब कच्चे माल की कम लागत का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है, जबकि एनालिस्ट्स (Analysts) सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सेगमेंट में मार्जिन (Margin) सुधार की उम्मीद जता रहे हैं।
वेस्ट एशिया सीजफायर और GTL Transmission डीमर्जर का असर
गुजरात एनर्जी के शेयरों में हाल के दिनों में बड़ी गिरावट देखी गई है। 17 जून से अब तक शेयर में करीब 25% की गिरावट आ चुकी है, जबकि बाजार में तेजी का माहौल था। इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह दो बड़े घटनाक्रम रहे - वेस्ट एशिया में सीजफायर (Ceasefire) का ऐलान और कंपनी के गैस ट्रांसमिशन बिजनेस, GTL Transmission का औपचारिक डीमर्जर (Demerger)।
कच्चे माल की कीमतों में नरमी का फायदा
वेस्ट एशिया में सीजफायर के बाद एनर्जी कंपनियों के लिए सप्लाई (Supply) की स्थिति काफी बदल गई है। शिपिंग रूट (Shipping Route) सामान्य होने से प्रोपेन (Propane) की उपलब्धता बढ़ी है, जिससे इसकी कीमतों में भारी गिरावट आई है। प्रोपेन की जुलाई लोडिंग की कीमत घटकर $580 प्रति टन रह गई है, जो जून में $760 प्रति टन थी। निवेशकों के लिए यह बदलाव अहम है, क्योंकि प्रोपेन जैसी कच्चे माल की कम लागत और लॉजिस्टिक्स (Logistics) की लागत में कमी से कंपनी के सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) को सहारा मिल सकता है या वे सुधर सकते हैं।
बिजनेस आउटलुक और ग्रोथ के फैक्टर
आपूर्ति में तत्काल बदलावों से परे, गुजरात एनर्जी का भविष्य गैस खरीद की रणनीति पर टिका है। कंपनी ब्रेंट-लिंक्ड (Brent-linked) लॉन्ग-टर्म एलएनजी (LNG) कॉन्ट्रैक्ट्स (Contracts) का इस्तेमाल करती है, जिससे उसे प्रतिस्पर्धी दरों पर गैस उपलब्ध होती है। इस व्यवस्था का मकसद कंपनी की कमाई में उतार-चढ़ाव को कम करना और ग्लोबल गैस कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी से बचाना है। एनालिस्ट्स (Analysts) फिलहाल कंपनी के सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सेगमेंट पर नजर बनाए हुए हैं। उम्मीद है कि वित्तीय वर्ष 2029 तक वॉल्यूम ग्रोथ (Volume Growth) और EBITDA (Earnings Before Interest, Tax, Depreciation, and Amortization) में क्रमशः 6.9% और 8.4% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देखी जा सकती है। इस रिकवरी के लिए एक अहम फैक्टर मोरबी (Morbi) औद्योगिक हब से गैस की मांग है, जिसके वित्तीय वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही तक पहले के स्तर पर लौटने की उम्मीद है।
मार्केट वैल्यूएशन (Market Valuation) और जोखिम
GTL Transmission के डीमर्जर के बाद, कंपनी के वैल्यूएशन (Valuation) प्रोफाइल में बदलाव आया है। इसके चलते कुछ एनालिस्ट्स (Analysts) ने बिजनेस पर फोकस कम होने के मद्देनजर अपने प्राइस टारगेट (Price Target) को घटा दिया है। फिलहाल शेयर ₹295.05 पर ट्रेड कर रहा है। हालांकि हालिया बिकवाली काफी बड़ी रही है, बाजार इस बात पर बारीकी से नजर रखे हुए है कि कंपनी सामान्य होती कीमतों के माहौल में औद्योगिक मांग के स्तर को बनाए रख पाती है या नहीं। भविष्य में वित्तीय प्रदर्शन को संचालित करने वाले मुख्य कारक मार्जिन की स्थिरता और औद्योगिक वॉल्यूम की रिकवरी की गति का सबूत देखने के लिए निवेशकों को आगामी तिमाही नतीजों पर नजर रखनी चाहिए।
