सरकार ने Green Energy Corridor Phase 3 के लिए **₹1.86 लाख करोड़** के बड़े बजट को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के चलते KEC International और Transformers and Rectifiers (India) जैसी दिग्गज कंपनियों पर नजरें हैं, क्योंकि **₹23,500 करोड़** तक के नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।
भारत सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को रफ्तार देने के लिए Green Energy Corridor (GEC-III) के तीसरे चरण को हरी झंडी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना का कुल बजट ₹1.86 लाख करोड़ है, जो भारत के 900 गीगावाट नॉन-फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी के लक्ष्य को हासिल करने में मददगार साबित होगा।\n\n### बिडिंग में बदलाव और मार्जिन का रिस्क\n\nइस बार सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए 'टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग' (TBCB) मॉडल को अपनाया है। इसका मकसद काम में पारदर्शिता और दक्षता लाना है। हालांकि, निवेशकों को यह समझना होगा कि यह एक 'डबल-एज्ड स्वॉर्ड' यानी दोधारी तलवार की तरह है। कंपनियां ऑर्डर तो पा लेंगी, लेकिन कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण उनके मुनाफे (Margins) पर दबाव बढ़ सकता है।\n\n### एग्जीक्यूशन और पेमेंट में चुनौतियां\n\nपावर ट्रांसमिशन सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए जमीन अधिग्रहण, फॉरेस्ट क्लियरेंस और राइट-ऑफ-वे जैसी समस्याएं पुरानी हैं। अगर इन प्रोजेक्ट्स में देरी हुई, तो लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा, स्टेट डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (Discoms) की खराब फाइनेंशियल हेल्थ भी एक बड़ी चिंता है, जो पेमेंट चक्र (Payment cycle) में देरी कर सकती है।\n\n### क्या है निवेशकों के लिए स्ट्रैटेजी?\n\nसरकार ने इन प्रोजेक्ट्स के लिए 15 से 24 महीने का टाइट डेडलाइन रखा है। ऐसे में जो कंपनियां वर्टिकली इंटीग्रेटेड हैं—यानी जो अपने कंपोनेंट्स खुद बनाती हैं—उनका पलड़ा भारी रहेगा। निवेशकों को अब ऑर्डर विनिंग के साथ-साथ मैनेजमेंट की कमेंट्री और मार्जिन सस्टेनेबिलिटी पर बारीक नजर रखनी होगी।
