Ethanol-Diesel Blend पर सरकार का यू-टर्न! कुकिंग फ्यूल के तौर पर इथेनॉल का इस्तेमाल होगा

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AuthorNeha Patil|Published at:
Ethanol-Diesel Blend पर सरकार का यू-टर्न! कुकिंग फ्यूल के तौर पर इथेनॉल का इस्तेमाल होगा

मोदी सरकार ने डीजल में इथेनॉल मिलाने की योजनाओं को जोरदार झटका दिया है। सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए, सरकार ने साफ कर दिया है कि इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। हालांकि, इथेनॉल को कुकिंग फ्यूल के तौर पर बढ़ावा देने की नई योजनाएं बनाई जा रही हैं।

इथेनॉल-डीजल ब्लेंड को सुरक्षा कारणों से रोका

पेट्रोलियम मंत्रालय ने संसद में साफ कर दिया है कि डीजल में इथेनॉल मिलाने की कोई योजना नहीं है। पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों और ऑटो निर्माताओं के वैज्ञानिक आकलन में पाया गया है कि डीजल में इथेनॉल मिलाने से उसका फ्लैश पॉइंट (ज्वलनशीलता तापमान) काफी कम हो जाता है। इससे ईंधन के रखरखाव में सुरक्षा जोखिम बढ़ जाता है। यही वजह है कि इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया है।

पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग जारी

फिलहाल, सरकार पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने (E20) के लक्ष्य पर कायम है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस ब्लेंडिंग रेशियो को फिलहाल और बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। भविष्य में अगर इसे बढ़ाने का कोई भी कदम उठाया जाता है, तो व्यापक तकनीकी और वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और अन्य हितधारकों से सलाह-मशविरा करके निर्णय लिया जाएगा।

कुकिंग फ्यूल बनेगा इथेनॉल?

डीजल और पेट्रोल में इथेनॉल की अधिक ब्लेंडिंग की योजनाओं पर फिलहाल विराम लगने के बाद, सरकार अब इथेनॉल को एक व्यवहार्य कुकिंग फ्यूल (रसोई गैस का विकल्प) के तौर पर बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत की लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) पर आयात निर्भरता को कम करना और देश की अतिरिक्त इथेनॉल उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग करना है। एलपीजी उपकरण अनुसंधान केंद्र (LPG Equipment Research Centre), जो प्रमुख तेल कंपनियों का एक संयुक्त उद्यम है, वर्तमान में इथेनॉल-आधारित कुकिंग तकनीक विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

इस नीतिगत बदलाव से ऊर्जा और चीनी (Sugar) सेक्टर में सक्रिय कंपनियों को काफी स्पष्टता मिलेगी। डिस्टिलरी और चीनी निर्माण क्षेत्र की कंपनियां इथेनॉल उत्पादन क्षमता का विस्तार कर रही हैं। पेट्रोल ब्लेंडिंग मैंडेट के अलावा खपत के नए रास्ते खोजना उनके मार्जिन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, इथेनॉल-आधारित कुकिंग स्टोव की नई तकनीकों की लागत-प्रभावशीलता और बड़े पैमाने पर अपनाए जाने पर इसकी सफलता निर्भर करेगी।

कच्चे माल की आपूर्ति का जोखिम

निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि इस क्षेत्र में कच्चे माल (Feedstock) की आपूर्ति से जुड़े जोखिम भी हैं। भारत में इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और अनाज से बनता है, इसलिए इसकी उपलब्धता कृषि चक्रों और खाद्य सुरक्षा नीतियों से जुड़ी हुई है। अचानक वर्षा में बदलाव, फसल उत्पादन में कमी, या खाद्य फसलों को ईंधन के लिए उपयोग करने पर सरकारी प्रतिबंध आपूर्ति और उत्पादन लागत को प्रभावित कर सकते हैं। अब पूरा उद्योग और बाजार सितंबर 2026 का इंतजार कर रहा है, जब सरकार इथेनॉल को एक मुख्यधारा की घरेलू कुकिंग फ्यूल के रूप में अपनाने के लिए एक विस्तृत नीतिगत ढांचा जारी करने की उम्मीद है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.