सरकार ने IOC, BPCL और HPCL जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को फिलहाल कोई राहत नहीं देने का फैसला किया है। Q1 के घाटे की भरपाई के लिए मांगी गई ₹75,000 करोड़ की रकम का मुद्दा अब 2027 तक के लिए टाल दिया गया है।
सरकारी कंपनियों IOC, BPCL और HPCL के लिए आने वाला समय चुनौतियों भरा हो सकता है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल ईंधन बिक्री से हुए नुकसान की भरपाई के लिए कोई कैश कंपनसेशन नहीं देगी। यह फैसला कम से कम साल 2027 तक प्रभावी रहेगा। कंपनियों ने अप्रैल-जून 2026 की तिमाही के लिए ₹75,000 करोड़ की सहायता की मांग की थी, जिसे ठुकरा दिया गया है।
घाटे का बड़ा आंकड़ा
वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इस स्थिति का असर कंपनियों के बैलेंस शीट पर साफ दिख रहा है। अप्रैल-जून तिमाही में कंपनियों का कुल अंडर-रिकवरी (कुल घाटा) ₹1.88 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी डीजल की है, जिससे कंपनियों को ₹1.44 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। वहीं, LPG और पेट्रोल पर घाटा क्रमशः ₹24,148 करोड़ और ₹19,905 करोड़ दर्ज किया गया है।
सरकार की रणनीति और बाजार की चिंता
सरकार का कहना है कि वह अल्पकालिक अस्थिरता के आधार पर तुरंत कोई वित्तीय हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ने से दाम कम हो सकते हैं। हालांकि, इस फैसले से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। अब सारा वित्तीय बोझ कंपनियों के मार्जिन और बैलेंस शीट पर होगा। अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो कंपनियों का मुनाफा और उनका भविष्य का कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान प्रभावित हो सकता है।
अब शेयरधारकों की नजरें इस बात पर होंगी कि ये कंपनियां रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन को कैसे मैनेज करती हैं, क्योंकि फिलहाल सरकार से किसी भी प्रकार की राहत की उम्मीद खत्म हो गई है।
