E20 फ्यूल पर सरकार का बड़ा खुलासा! आपकी गाड़ी के लिए सुरक्षित है या नहीं, जानें सब कुछ

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AuthorAditya Rao|Published at:
E20 फ्यूल पर सरकार का बड़ा खुलासा! आपकी गाड़ी के लिए सुरक्षित है या नहीं, जानें सब कुछ

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने E20 फ्यूल को लेकर लोगों की चिंताओं को दूर करने के लिए एक विस्तृत FAQ जारी किया है। सरकार का कहना है कि **20%** इथेनॉल मिश्रण वाला यह प्रोग्राम वैज्ञानिक रूप से परखा हुआ है और भारत का तेल आयात बिल कम करने के लिए ज़रूरी है।

E20 फ्यूल: क्या आपकी गाड़ी के लिए है सेफ?

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने E20 फ्यूल, जिसमें पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिला होता है, को लेकर ग्राहकों और इंडस्ट्री की चिंताओं को दूर करने के लिए एक नई पहल की है। सरकार ने एक विस्तृत FAQ जारी कर यह साफ किया है कि E20 फ्यूल से गाड़ियों को नुकसान पहुंचने की खबरें गलत हैं। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि यह प्रोग्राम दो दशकों के रिसर्च और टेस्टिंग पर आधारित है।

साइंटिफिक रिसर्च और गाड़ियों की कंपैटिबिलिटी

सरकार ने बताया कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के सहयोग से इंजन कैलिब्रेशन और मटेरियल ड्यूरेबिलिटी पर काफी विस्तृत टेस्टिंग की गई है। मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) और हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) जैसी बड़ी ऑटो कंपनियों के डेटा के अनुसार, पुरानी गाड़ियां जो E20 के लिए सर्टिफाइड नहीं भी हैं, उनमें भी इंजन फेल होने या पुर्ज़ों में जंग लगने जैसी कोई बड़ी समस्या देखने को नहीं मिली है।

मंत्रालय ने माना कि कुछ गाड़ियों में फ्यूल इकोनॉमी 3-5% तक कम हो सकती है, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि E20 का ऑक्टेन रेटिंग ज़्यादा होता है और यह क्लीनर कम्बशन (cleaner combustion) देता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पुरानी गाड़ियों के मैनुअल में 'E10 कंपेटिबल' का लेबल उस समय के मानकों के हिसाब से होता है, और इसका मतलब यह नहीं है कि वो E20 के लिए सुरक्षित नहीं हैं।

आर्थिक फायदे और इंफ्रास्ट्रक्चर

E20 प्रोग्राम भारत की इंपोर्टेड क्रूड ऑयल पर निर्भरता कम करने की रणनीति का एक अहम हिस्सा है। साल 2014-15 से, इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम के तहत किसानों को ₹1.66 लाख करोड़ से ज़्यादा दिए गए हैं और ₹1.97 लाख करोड़ से ज़्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार बचाया गया है।

इस टारगेट को बनाए रखना इस सेक्टर की आर्थिक सेहत के लिए बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इथेनॉल प्रोडक्शन प्लांट्स में बैंकों से ₹1 लाख करोड़ से ज़्यादा का निवेश फंसा हुआ है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corporation), भारत पेट्रोलियम (Bharat Petroleum), और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (Hindustan Petroleum) जैसी पब्लिक सेक्टर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने इस बदलाव के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में अहम भूमिका निभाई है। मंत्रालय का कहना है कि 100,000 से ज़्यादा रिटेल आउटलेट्स पर अलग-अलग फ्यूल को बनाए रखने का लॉजिस्टिकल खर्च देखते हुए, कई तरह के पेट्रोल वेरिएंट पेश करना संभव नहीं है।

भविष्य की निगरानी और इथेनॉल की कीमत

इथेनॉल की खरीद फिलहाल सरकार द्वारा तय की गई कीमतों पर होती है, ताकि किसानों को सही दाम मिल सकें। उदाहरण के लिए, मक्के से बने इथेनॉल की खरीद GST और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट को छोड़कर लगभग ₹71.86 प्रति लीटर पर की जाती है। सरकार ने बताया कि जब क्रूड ऑयल की कीमतें कम होती हैं, तो E20 बनाना प्योर पेट्रोल से महंगा हो सकता है, लेकिन जब क्रूड ऑयल की कीमतें $120-$130 प्रति बैरल के पार जाती हैं, तो यह वैश्विक ऊर्जा लागतों के खिलाफ एक सुरक्षा (hedge) का काम करता है।

निवेशकों और ग्राहकों को भारत के इथेनॉल ब्लेंडिंग टारगेट्स पर नज़र रखनी चाहिए, जो 2025-26 एनर्जी ईयर तक 20% तक पहुंचने का अनुमान है। सरकार का इस टाइमलाइन पर लगातार फोकस और ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के स्पेसिफिकेशन्स का सख्ती से पालन, एनर्जी सेक्टर के लिए मुख्य निगरानी योग्य बिंदु बने रहेंगे।

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