Compressed Biogas: सरकार का बड़ा दांव, GOBARdhan स्कीम के लिए जारी किए **₹23,731 करोड़**

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AuthorNeha Patil|Published at:
Compressed Biogas: सरकार का बड़ा दांव, GOBARdhan स्कीम के लिए जारी किए **₹23,731 करोड़**

भारत सरकार ने GOBARdhan स्कीम के लिए **2035-36** तक **₹23,731 करोड़** का फंड मंजूर किया है। इसका मकसद बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देना और एनर्जी इंपोर्ट कम करना है, लेकिन पुराने प्रोजेक्ट्स के अनुभव के बाद निवेशकों को इसके एग्जीक्यूशन पर बारीकी से नजर रखनी होगी।

भारत सरकार ने देश में बायोगैस के उत्पादन को गति देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इस नई स्कीम का लक्ष्य जैविक कचरे को कंप्रेस्ड बायोगैस में बदलकर नेचुरल गैस पर निर्भरता कम करना है। सरकार का यह कदम भारत को एनर्जी सेक्टर में 'आत्मनिर्भर' बनाने की एक बड़ी कोशिश है।

पुरानी योजनाओं से क्या सबक लिया?

इन्वेस्टर्स को यह याद रखना चाहिए कि साल 2018 में आई SATAT स्कीम का टारगेट 5,000 प्लांट लगाने का था, लेकिन अभी तक सिर्फ 217 प्लांट ही चालू हो पाए हैं। पिछली विफलताओं में मुख्य वजह कच्चे माल की कमी, लॉजिस्टिक्स का महंगा होना और 'बायो-स्लरी' (Bio-slurry) के लिए सही मार्केट न मिल पाना रही है।

सरकार की नई स्ट्रेटजी

इस बार सरकार ने इसे फर्टिलाइजर कंपनियों के साथ जोड़ा है। सार्वजनिक क्षेत्र की फर्टिलाइजर कंपनियां खाद के डिस्ट्रीब्यूशन का जिम्मा संभालेंगी, जिससे प्लांट लगाने वालों को कमाई का एक जरिया मिलेगा। इसके अलावा, प्लांट लगाने के लिए अब सैटेलाइट डेटा और ग्राउंडवाटर की मैपिंग का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि प्लांट उन्हीं इलाकों में लगे जहां कचरा आसानी से उपलब्ध हो।

निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?

सिर्फ सरकारी फंड को देखकर उत्साहित होने के बजाय, निवेशकों को 3 बातों पर नजर रखनी चाहिए:

  1. बायोमास सप्लाई चेन की मजबूती।
  2. प्लांट लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण (Land acquisition) की रफ्तार।
  3. बायो-स्लरी के लिए खरीदारों की उपलब्धता।

कंपनियों का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वे कितनी कुशलता से इन ऑपरेशनल चुनौतियों को पार कर पाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.