ग्लोबल रिफाइनर्स अब डीजल की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे पेट्रोल का एक्सपोर्ट **24%** तक गिर गया है। डीजल और पेट्रोल की कीमतों में रिकॉर्ड अंतर के कारण रिफाइनरी का कामकाज बदल रहा है, जिसका सीधा असर Reliance Industries, IOCL, BPCL और HPCL जैसे दिग्गजों के मार्जिन पर पड़ सकता है।
दुनिया भर की रिफाइनरीज इस समय अपनी प्रोडक्शन रणनीति को पूरी तरह बदल रही हैं। बेहतर मुनाफे के लालच में रिफाइनर्स पेट्रोल के बजाय डीजल के उत्पादन को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि ग्लोबल पेट्रोल एक्सपोर्ट में साल-दर-साल 24% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
क्यों बदल रहा है मार्केट का गणित?
इस बदलाव के पीछे की वजह इकोनॉमिक्स है। अमेरिका में डीजल और पेट्रोल की कीमतों का अंतर बढ़कर $60 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि एक साल पहले यह अंतर $3 से भी कम था। इस भारी अंतर को देखते हुए रिफाइनर्स अब डीजल आउटपुट बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। OECD देशों के आंकड़े बताते हैं कि दूसरी तिमाही में पेट्रोल का उत्पादन करीब 2% घटा है, जबकि डीजल का उत्पादन बढ़ गया है।
भारतीय निवेशकों के लिए चिंता क्या है?
Reliance Industries, Indian Oil Corporation (IOCL), Bharat Petroleum (BPCL) और Hindustan Petroleum (HPCL) जैसी कंपनियां अपने 'प्रोडक्ट स्लेट' को मैनेज करती हैं। जब डीजल और पेट्रोल के बीच प्राइस स्प्रेड इतना ज्यादा हो जाता है, तो रिफाइनर्स मुनाफे वाली फ्यूल की तरफ झुकते हैं। हालांकि, अगर कंपनियां अपनी प्रोडक्शन लाइन को तेजी से नहीं बदल पाईं, तो यह उनके ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) पर सीधा दबाव डाल सकता है।
इसके अलावा, पेट्रोल बनाने में इस्तेमाल होने वाले नैफ्था (Naphtha) के ग्लोबल एक्सपोर्ट में 30% की गिरावट आई है, जिससे ब्लेंडिंग की लागत भी बढ़ गई है। मिडिल ईस्ट और रूस-यूक्रेन के बीच जारी तनाव इस स्थिति को और गंभीर बना रहा है। आने वाले समय में निवेशकों को कंपनियों के 'क्रैक स्प्रेड्स' (Crack Spreads) और मैनेजमेंट की कमेंट्री पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि यही अगले क्वार्टर में मुनाफे की दिशा तय करेंगे।
