मिडल ईस्ट में सप्लाई संकट के चलते ग्लोबल लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की कीमतें उछलकर **$30** प्रति MMBtu के स्तर पर पहुंच गई हैं। हालांकि GAIL जैसी भारतीय कंपनियां अपनी सप्लाई बनाए रखने में सफल रही हैं, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण औद्योगिक सेक्टर अब वैकल्पिक ईंधन की ओर रुख कर रहा है।
ग्लोबल एनर्जी मार्केट इस वक्त भारी उठापटक के दौर से गुजर रहा है। मिडल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव ने प्रमुख सप्लाई रूटों को बाधित कर दिया है। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का बंद होना एनर्जी एक्सपोर्ट के लिए एक बड़ी बाधा बन गया है, जिससे दुनिया की कुल नेचुरल गैस सप्लाई का करीब 20% हिस्सा प्रभावित हुआ है। इस हलचल के कारण एशियन स्पॉट LNG की कीमतें पहले के $10 प्रति MMBtu के स्तर से बढ़कर अब $30 प्रति MMBtu के करीब पहुंच गई हैं।
भारतीय गैस कंपनियों की तैयारी
भारतीय एनर्जी कंपनियों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सप्लाई सिक्योरिटी और बढ़ती इंपोर्ट कॉस्ट के बीच तालमेल बिठाना है। GAIL (India) और Petronet LNG जैसी बड़ी कंपनियां अपनी फ्लेक्सिबल प्रोक्योरमेंट और ट्रेडिंग टीमों के जरिए वैकल्पिक कार्गो सोर्स कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लॉजिस्टिक संकट के बावजूद GAIL अपनी 90% से 95% तक की जरूरत को पूरा करने में कामयाब रही है।
हालांकि, इन महंगी कीमतों का असर कंज्यूमर लेवल पर साफ दिख रहा है। फर्टिलाइजर, पावर और सिरेमिक जैसे सेक्टर, जो कीमतों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं, अब अपने ऑपरेटिंग खर्च को कम करने के लिए कोयले और फ्यूल ऑयल जैसे सस्ते लेकिन ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले विकल्पों को अपना रहे हैं। यह स्थिति भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन के लिए एक बड़ी चुनौती है।
भविष्य की राह और जोखिम
बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले 4 से 5 वर्षों में वैश्विक स्तर पर 150 मिलियन से 200 मिलियन टन की नई LNG प्रोडक्शन क्षमता शुरू होगी, जिससे कीमतें घटकर $7 से $9 प्रति MMBtu के दायरे में आ सकती हैं।
लेकिन निवेशकों को फिलहाल सावधानी बरतनी चाहिए। मिडल ईस्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान की भरपाई में लंबा समय लग सकता है। यदि गैस की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो उद्योगों का कोयले की तरफ झुकाव भविष्य में सेक्टर की रिकवरी को धीमा कर सकता है। निवेशकों को अब ग्लोबल सप्लाई प्रोजेक्ट्स की प्रगति और सरकारी एनर्जी नीतियों पर कड़ी नजर रखनी होगी।
