साल 2026 में Natural Gas की ग्लोबल डिमांड में **7 बिलियन क्यूबिक मीटर** की गिरावट आने की आशंका है, जो 2022 के बाद पहली बार हुआ है। Strait of Hormuz के मौजूदा संकट ने ग्लोबल LNG सप्लाई का **20%** हिस्सा बाधित कर दिया है, जिससे कीमतों में भारी उछाल आया है और उभरते बाजारों को खपत घटाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
दुनिया भर के एनर्जी मार्केट में 2026 एक बड़े बदलाव का साल साबित हो रहा है। Strait of Hormuz में चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण 20% ग्लोबल LNG सप्लाई बाधित हुई है। इस सप्लाई चेन में रुकावट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है, जिसे एनर्जी की भाषा में 'डिमांड डिस्ट्रक्शन' कहा जा रहा है, यानी महंगी गैस के कारण उद्योग और पावर प्लांट अपनी खपत कम करने को मजबूर हैं।
भारत के पावर सेक्टर पर दबाव
भारत के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। मई 2026 में देश में बिजली की पीक डिमांड 271 गीगावाट तक पहुंच गई थी, जिसे पूरा करने के लिए गैस-आधारित पावर प्लांट की भूमिका काफी अहम रही। इंडियन गैस एक्सचेंज (IGX) पर अप्रैल से मई 2026 के बीच खरीद में सालाना आधार पर 340% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
गैस पर निर्भर रहने वाली फर्में, जैसे फर्टिलाइजर कंपनियां और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर, पर मार्जिन का दबाव बढ़ सकता है। निवेशकों को यह नजर रखनी चाहिए कि कंपनियां बढ़ती फ्यूल कॉस्ट का बोझ खुद झेल रही हैं या ग्राहकों पर डाल रही हैं। इसके अलावा, उन कंपनियों पर नजर रखें जिनके पास लॉन्ग-टर्म सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट हैं, क्योंकि वे स्पॉट मार्केट की भारी उतार-चढ़ाव से बेहतर सुरक्षित हैं। आगे चलकर भारत में घरेलू गैस उत्पादन और वैकल्पिक ऊर्जा समाधानों पर जोर और तेज हो सकता है।
