मिडिल ईस्ट का तनाव और तेल की सप्लाई
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी सिर्फ खबरों पर प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला (Global Oil Supply Chain) की अंदरूनी कमजोरियों को भी दर्शाती है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव, जिसमें ड्रोन घटना और टैंकर को निशाना बनाना शामिल है, ने होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर चिंता बढ़ा दी है। यह बढ़ा हुआ भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम (Geopolitical Risk Premium) पहले से ही तंग आपूर्ति पर दबाव बना रहा है, जो इन्वेंट्री में भारी कमी और ओपेक+ (OPEC+) द्वारा उत्पादन स्तरों के सावधानीपूर्वक समायोजन से और बढ़ गया है।
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आई है। अमेरिकी सेना ने पुष्टि की है कि उसने अरब सागर में USS अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत के पास आक्रामक रूप से पहुंचे एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया है। इसी समय, ईरानी सैनिकों ने कथित तौर पर होरमुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी-ध्वज वाले टैंकर 'स्टेना इम्पेरेटिव' को परेशान किया। ये घटनाएं तेल की कीमतों में एक भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम फिर से जोड़ रही हैं, जो हाल ही में कूटनीतिक संकेतों के बीच कम हो गया था। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स मंगलवार की बढ़त पर 64 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गए, जबकि ब्रेंट क्रूड 67 डॉलर से ऊपर बंद हुए। इस संवेदनशीलता का मुख्य कारण मिडिल ईस्ट की स्थिति है, जो दुनिया के लगभग एक-तिहाई कच्चे तेल का स्रोत है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर इस क्षेत्र में कोई संघर्ष होता है तो इससे सप्लाई में काफी बाधा आ सकती है, जिससे कीमतें 80-100 डॉलर प्रति बैरल की सीमा तक पहुंच सकती हैं, खासकर अगर GCC निर्यात में भी समस्या आती है।
इन्वेंट्री में कमी और ओपेक+ का संतुलन
कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव को बढ़ाने वाला एक और कारक अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार (U.S. Crude Oil Stockpiles) में आई उल्लेखनीय कमी है। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) ने 30 जनवरी, 2026 को समाप्त सप्ताह के लिए 0.25 मिलियन बैरल की गिरावट की सूचना दी है। हालांकि यह आंकड़ा आपूर्ति में कमी का संकेत देता है, लेकिन यह कुछ बाजार की उम्मीदों से कम है और आधिकारिक अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) डेटा की पुष्टि का इंतजार है, जो 5 फरवरी, 2026 को जारी होगा। जनवरी 2026 में जारी EIA के शॉर्ट-टर्म एनर्जी आउटलुक (Short-Term Energy Outlook) ने 2026 में वैश्विक तेल उत्पादन मांग से अधिक रहने का अनुमान लगाया था, जिससे इन्वेंट्री बढ़ने की उम्मीद थी, इसके बावजूद कीमतों को नियर-टर्म में गिरावट से सहारा मिला है। वहीं, ओपेक+ (OPEC+) को मार्च या अप्रैल से वैश्विक तेल मांग में धीरे-धीरे वृद्धि की उम्मीद है, जो बाजार में अधिक संतुलन ला सकती है। समूह 1 मार्च को यह तय करेगा कि पहली तिमाही (First Quarter) में उत्पादन रोकने के बाद क्या वह मासिक उत्पादन वृद्धि फिर से शुरू करेगा।
व्यापक बाजार परिदृश्य और भविष्य का अनुमान
यह मूल्य वृद्धि व्यापक कमोडिटी बाजार (Commodity Market) में अस्थिरता की पृष्ठभूमि में हुई है। इस सप्ताह की शुरुआत में सोने और चांदी में तेज गिरावट आई थी, जिसके बाद उनमें आंशिक सुधार हुआ, जो वित्तीय बाजारों में सामान्य घबराहट को दर्शाता है। अमेरिकी डॉलर (U.S. Dollar) की कमजोरी ने भी ऊर्जा की कीमतों को बढ़ावा दिया। आगे देखते हुए, 2026 के लिए तेल की कीमतों के विश्लेषक पूर्वानुमान (Analyst Forecasts) अलग-अलग हैं। कुछ का अनुमान है कि 2026 में आपूर्ति मांग से अधिक होने के कारण कीमतें गिर सकती हैं। उदाहरण के लिए, EIA का अनुमान है कि 2026 में ब्रेंट क्रूड का औसत 56 डॉलर प्रति बैरल रहेगा, जो 2025 से कम है, और जेपी मॉर्गन रिसर्च (J.P. Morgan Research) ने 2026 के लिए ब्रेंट का अनुमान 58 डॉलर प्रति बैरल लगाया था। हालांकि, यूबीएस (UBS) का अनुमान है कि 2026 में जून में ब्रेंट क्रूड 65 डॉलर/बैरल और दिसंबर में 67 डॉलर/बैरल रहेगा। EIA ने यह भी अनुमान लगाया है कि 2026 में अमेरिकी कच्चे तेल का उत्पादन कम होगा। ओविंटिव (Ovintiv) और ऑक्सिडेंटल पेट्रोलियम (Occidental Petroleum) जैसी बड़ी एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन कंपनियों को विश्लेषकों से मिली-जुली भावनाएं मिल रही हैं, वोल्फ रिसर्च (Wolfe Research) ने 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन प्राइस टारगेट को एडजस्ट किया है। बाजार की तात्कालिक दिशा संभवतः भू-राजनीतिक तनावों में कमी, आगे के इन्वेंट्री डेटा और ओपेक+ के आगामी उत्पादन निर्णयों पर निर्भर करेगी।