Gujarat State Fertilizers and Chemicals (GSFC) ने जामनगर में **5,00,000 टन** क्षमता वाला ग्रीन अमोनिया प्लांट लगाने की योजना बनाई है। कंपनी इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए एक पार्टनर की तलाश कर रही है, जिसका **90%** उत्पादन विदेशों में एक्सपोर्ट किया जाएगा।
बड़ा बदलाव और एक्सपोर्ट की रणनीति
GSFC ने जामनगर की अपनी सिक्का यूनिट में इस प्लांट को लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी का मकसद केवल फर्टिलाइजर सेक्टर तक सीमित न रहकर ग्रीन एनर्जी की ओर कदम बढ़ाना है। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी 51% की बहुमत हिस्सेदारी अपने पास रखेगी, जबकि पार्टनर से टेक्नोलॉजी और कैपिटल के साथ सहयोग की उम्मीद है।
कंपनी का बड़ा हिस्सा यानी कुल उत्पादन का 90% एक्सपोर्ट मार्केट जैसे यूरोप, जापान और दक्षिण कोरिया को टारगेट करेगा। बाकी 10% का इस्तेमाल कंपनी खुद फर्टिलाइजर बनाने के लिए करेगी।
प्रोजेक्ट की चुनौतियां और रिस्क
यह प्रोजेक्ट काफी बड़ा और कैपिटल-इन्टेन्यिव (Capital-intensive) है। इसमें ग्रीन हाइड्रोजन बनाने के लिए 2 से 3 गीगावाट की सोलर और विंड पावर कैपेसिटी की जरूरत होगी। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि:
- एग्जीक्यूशन रिस्क: इतने बड़े प्रोजेक्ट्स में कंस्ट्रक्शन देरी और लागत बढ़ने का जोखिम हमेशा बना रहता है।
- मार्केट वोलैटिलिटी: फर्टिलाइजर सेक्टर सब्सिडी और कच्चे माल की कीमतों के उतार-चढ़ाव से प्रभावित रहता है।
- फाइनेंशियल भार: पार्टनर चुनने के बाद फंड जुटाने की प्रक्रिया और इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रगति शेयर की चाल पर असर डालेगी।
दिसंबर 2030 तक इस प्लांट को शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन फिलहाल बाजार की नजरें पार्टनर की चयन प्रक्रिया और फंडिंग के अगले अपडेट्स पर टिकी हैं।
