GAIL India ने अपने रत्नागिरी LNG टर्मिनल की क्षमता को पूरी तरह बहाल करने के लिए **₹600 करोड़** के निवेश का ऐलान किया है। इस प्रोजेक्ट के जरिए टर्मिनल अब अपनी पूरी **5 मिलियन टन** की क्षमता के साथ काम कर सकेगा, जिसका लक्ष्य **जून 2027** तक उत्पादन को दोगुना करना है।
GAIL India अपने रत्नागिरी LNG टर्मिनल की पुरानी दिक्कतों को दूर करने के लिए बड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है। कंपनी यहां एक डेडिकेटेड हीटिंग यूनिट और कैप्टिव पावर प्लांट लगाने के लिए ₹600 करोड़ (लगभग $63 मिलियन) खर्च करेगी। यह कदम री-गैसिफिकेशन (regasification) प्रक्रिया को स्मूथ बनाने के लिए बेहद जरूरी है।
क्यों है यह निवेश जरूरी?
वर्तमान में यह प्लांट अपनी कुल 5 मिलियन टन की क्षमता के आधे यानी 50% पर ही चल रहा है। इसकी बड़ी वजह बाहरी पावर प्लांट से मिलने वाली वेस्ट हीट पर निर्भरता रही है। जब से वह सोर्स उपलब्ध नहीं है, टर्मिनल का आउटपुट बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अब अपना खुद का पावर प्लांट होने से GAIL पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगी।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
यह कदम रत्नागिरी एसेट की पूरी क्षमता को अनलॉक करने की एक रणनीतिक कोशिश है। भारत में क्लीन फ्यूल की बढ़ती डिमांड के बीच, इससे कंपनी की इन्फ्रास्ट्रक्चर कैपेसिटी में इजाफा होगा।
रिस्क फैक्टर और चुनौतियां
हालांकि, निवेशकों को इस प्रोजेक्ट के एग्जीक्यूशन पर नजर रखनी होगी। बड़े एनर्जी प्रोजेक्ट्स में देरी और बजट से अधिक खर्च होना आम बात है। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव और इंपोर्टेड LNG की उपलब्धता भी टर्मिनल के मुनाफे पर असर डाल सकती है। रत्नागिरी (जिसे पहले डभोल के नाम से जाना जाता था) का पुराना इतिहास काफी पेचीदा रहा है, इसलिए जून 2027 की डेडलाइन कंपनी के लिए एक बड़ा टेस्ट होगी।
