GAIL (India) Limited ने एनर्जी रेगुलेटर PNGRB को साफ कर दिया है कि वह Indian Gas Exchange (IGX) के नए डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म का समर्थन नहीं करती। कंपनी का मानना है कि इससे ग्राहकों पर बिना वजह लागत बढ़ेगी और डिमांड की समस्या का समाधान नहीं होगा।
रेगुलेटरी मोर्चे पर घमासान
भारत की प्रमुख गैस मार्केटर कंपनी GAIL ने Indian Gas Exchange (IGX) के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें LNG टर्मिनल कैपेसिटी बुकिंग के लिए एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने की बात कही गई थी। इस मामले को लेकर कंपनी ने Petroleum and Natural Gas Regulatory Board (PNGRB) के पास अपनी आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई है।
ग्राहकों पर पड़ेगा बोझ
GAIL का तर्क है कि इस तरह का प्लेटफॉर्म लाने से ट्रांजैक्शन कॉस्ट बेवजह बढ़ जाएगी। पहले से ही ग्लोबल गैस कीमतों में उतार-चढ़ाव झेल रहे पावर प्लांट्स और इंडस्ट्रीज के लिए यह अतिरिक्त शुल्क एक बोझ साबित होगा। कंपनी का साफ कहना है कि इससे ऑपरेशनल लेवल पर कोई बड़ा फायदा नहीं होने वाला है।
खाली पड़ी है 50% से ज्यादा क्षमता
मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत की कुल LNG रिगैसीफिकेशन कैपेसिटी लगभग 57.5 MTPA (Million Tonnes Per Annum) है, जिसमें से 50% से ज्यादा क्षमता फिलहाल बेकार पड़ी है। GAIL का मानना है कि जब मांग ही नहीं है, तो बुकिंग के लिए नया डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना पूरी तरह गैर-जरूरी है।
मार्केट के लिए क्या हैं संकेत?
यह विवाद पारंपरिक गैस ट्रेडिंग और एक्सचेंज-बेस्ड प्लेटफॉर्म्स के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। जहां GAIL लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट्स के जरिए अपनी सप्लाई चेन संभालती है, वहीं IGX पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इन्वेस्टर्स के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि PNGRB इस मामले में क्या फैसला लेता है, क्योंकि यह देश में गैस इंफ्रास्ट्रक्चर के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
