GAIL India: अमेरिका में **$64 मिलियन** का निवेश, पर देश में पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स अटके - एनालिस्ट्स बंटे

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AuthorNeha Patil|Published at:
GAIL India: अमेरिका में **$64 मिलियन** का निवेश, पर देश में पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स अटके - एनालिस्ट्स बंटे
Overview

GAIL India ने अपनी अमेरिकी सब्सिडियरी, GAIL Global (USA) Inc. के लिए **$64 मिलियन** का पूंजी निवेश (capital investment) मंजूर किया है। इसका मुख्य उद्देश्य सब्सिडियरी के कर्ज को कम करना है। यह कदम ऐसे समय आया है जब कंपनी अपने घरेलू पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स में देरी का सामना कर रही है, जिसके कारण एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है।

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अमेरिका में $64 मिलियन का निवेश और कर्ज कटौती

GAIL India ने अपनी अमेरिकी सब्सिडियरी GAIL Global (USA) Inc. के लिए $64 मिलियन तक का पूंजी निवेश मंजूर किया है। यह फंड टेक्सस के Eagle Ford बेसिन में स्थित सब्सिडियरी के शेल एसेट्स (shale assets) से जुड़े कर्ज को चुकाने में मदद करेंगे। GAIL Global (USA) Inc. ने कैलेंडर ईयर 2025 में $7.6 मिलियन का टर्नओवर (turnover) दर्ज किया था। आपको बता दें कि GAIL के अमेरिकी शेल ऑपरेशंस को पहले भी गैस की कम कीमतों के कारण मुनाफा कमाने में दिक्कतें आई थीं, जिसके चलते कंपनी 2025 की शुरुआत में इस वेंचर से बाहर निकलने का संकेत दे चुकी थी। यह मौजूदा निवेश इन एसेट्स पर बने दबाव की ओर इशारा करता है।

घरेलू प्रोजेक्ट्स में हो रही देरी

दूसरी ओर, GAIL इंडिया अपने घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार प्रोजेक्ट्स में भी बड़ी शेड्यूलिंग समस्याओं से जूझ रही है। अहम पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स की कंप्लीशन डेट्स (completion dates) में बदलाव किया गया है। Jagdishpur–Haldia–Bokaro–Dhamra पाइपलाइन के Durgapur–Haldia और Dhamra–Haldia सेक्शन अब मार्च 2026 के बजाय सितंबर 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है। Mumbai–Nagpur–Jharsuguda पाइपलाइन प्रोजेक्ट जून 2026 तक पूरा होने का अनुमान है। इन देरी की वजह जरूरी परमिशन, जैसे Right of Use (RoU) और फिशरीज क्लीयरेंस (fisheries clearances) हासिल करने में आ रही दिक्कतें हैं, साथ ही कुछ क्षेत्रों में काम का अधूरा रहना भी शामिल है। लैंड एक्वीजीशन (land acquisition) और रेगुलेटरी (regulatory) बाधाओं से उत्पन्न होने वाली ऐसी देरी GAIL के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए एक पुरानी समस्या रही है, जिसके कारण Mumbai–Nagpur–Jharsuguda प्रोजेक्ट में पहले भी कई बार देरी और लागत वृद्धि देखी जा चुकी है।

शेयर की चाल और एनालिस्ट्स की राय

NSE पर GAIL (India) Ltd के शेयर 1.11% बढ़कर ₹139.20 पर बंद हुए। कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) लगभग ₹91,525 करोड़ थी। GAIL का पिछले बारह महीनों का P/E रेश्यो (P/E ratio), जो लगभग 10.6 से 13.19 के बीच है, सेक्टर के औसत 16.07 से 28.97 की तुलना में काफी कम है। यह वैल्यूएशन (valuation) इसे Gujarat State Petronet, Indraprastha Gas और Mahanagar Gas जैसे साथियों की तुलना में सस्ता दिखाता है, जो तेजी से बढ़ते नेचुरल गैस डिस्ट्रीब्यूशन मार्केट में ऑपरेट करते हैं।

शेयर में हालिया मामूली उछाल के बावजूद, गंभीर जोखिम बने हुए हैं। अमेरिकी सब्सिडियरी में निवेश कर्ज को संबोधित करता है, लेकिन इसके शेल एसेट्स के संभावित अंडरपरफॉरमेंस को उजागर करता है। घरेलू पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स में लगातार हो रही देरी, जो रेगुलेटरी और लैंड एक्वीजीशन की समस्याओं से प्रेरित है, रेवेन्यू ग्रोथ (revenue growth) और प्रोजेक्ट इकोनॉमिक्स (project economics) को प्रभावित कर सकती है। एनालिस्ट्स की राय GAIL पर बंटी हुई है। जहां कुछ ₹192 के टारगेट प्राइस के साथ 'Buy' रेटिंग बनाए हुए हैं, वहीं Kotak Institutional Equities और MarketsMOJO जैसे अन्य ने 'Sell' रेटिंग जारी की है। ये 'Sell' रेटिंग्स अर्निंग्स गाइडेंस (earnings guidance) में कमी, कैपिटल एलोकेशन (capital allocation) के फैसलों और पेट्रोकेमिकल बिजनेस (petrochemical business) में संभावित नुकसान की चिंताओं का हवाला देती हैं। स्टॉक की वोलेटिलिटी (volatility), जो इसके 52-हफ्ते की रेंज ₹134.36 के आसपास देखी गई है, निवेशकों की लगातार सतर्कता को दर्शाती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.