टैरिफ पर घमासान: GAIL और रेगुलेटर में क्यों ठनी?
GAIL (India) Limited ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) के उस फैसले पर आपत्ति जताई है, जिसमें कंपनी के इंटीग्रेटेड पाइपलाइन नेटवर्क के लिए टैरिफ तय किया गया है। PNGRB ने टैरिफ में 12% की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है, जो अब ₹65.69 प्रति mmBtu हो गया है। हालांकि, GAIL ने जो टैरिफ मांगा था, वह ₹78 प्रति mmBtu था। कंपनी का तर्क है कि PNGRB ने भविष्य के कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) और ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर (ओपेक्स) को शामिल नहीं किया है, साथ ही ट्रांसमिशन लॉस की गणना में भी गड़बड़ी की है।
भविष्य के निवेश पर खतरा?
GAIL के फाइनेंस डायरेक्टर, राकेश जैन ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के कैपेक्स और ओपेक्स को बाहर रखना, साथ ही ट्रांसमिशन लॉस का ठीक से आकलन न करना, कंपनी के वित्तीय मॉडल को प्रभावित कर सकता है। GAIL का कहना है कि उसे अपने विशाल पाइपलाइन नेटवर्क को बनाए रखने और अपग्रेड करने के लिए लंबी अवधि में भारी निवेश की आवश्यकता है। इन खर्चों को टैरिफ में शामिल न करने से भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए फंड की कमी हो सकती है। भारत का लक्ष्य 2030 तक ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 15% तक बढ़ाना है, जिसके लिए ऐसे बुनियादी ढांचे का विस्तार महत्वपूर्ण है। PNGRB ने भविष्य के कैपेक्स और रिप्लेसमेंट की जरूरत को स्वीकार तो किया है, लेकिन इसके पूर्ण 'ट्रू-अप' को FY28 की टैरिफ समीक्षा तक टाल दिया है, जिससे GAIL के लिए मध्यम अवधि में रेवेन्यू की अनिश्चितता बनी हुई है।
रेवेन्यू शेयरिंग का पेंच
यह विवाद केवल टैरिफ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि रेवेन्यू शेयरिंग के तरीके पर भी है। GAIL का दावा है कि PNGRB ने 75% से अधिक पाइपलाइन कैपेसिटी यूटिलाइजेशन के पूरे लाभ को गलत तरीके से ग्राहकों को आवंटित कर दिया है। कंपनी के अनुसार, यह 50/50 के अनिवार्य बंटवारे के विपरीत है। इस व्यवस्था का सीधा असर GAIL की प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ता है, जिसे कैपिटल एम्प्लॉयड पर 12% पोस्ट-टैक्स रिटर्न का अधिकार है। GAIL ने मार्च 31, 2049 तक ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर के लिए ₹1.83 लाख करोड़ और इंटीग्रेटेड नेचुरल गैस पाइपलाइन (INGPL) सिस्टम के लिए ₹56,498 करोड़ के बड़े कैपेक्स का अनुमान लगाया है, जो मौजूदा टैरिफ संरचना के तहत पर्याप्त रूप से समर्थित नहीं दिख रहा है। इस तरह के नियामक मतभेद शेयर की कीमतों पर बड़ा असर डाल सकते हैं, जैसा कि टैरिफ ऑर्डर की घोषणा के बाद GAIL के शेयरों में 6% से अधिक की गिरावट से पता चला।
शेयर बाजार और एनालिस्ट्स की राय
GAIL का शेयर 4 फरवरी, 2026 को लगभग ₹165.41 पर ट्रेड कर रहा था। पिछले साल शेयर में लगभग 7.85% की गिरावट देखी गई। भारतीय ऑयल और गैस सेक्टर वर्तमान में लगभग 13.9x के पी/ई रेशियो पर कारोबार कर रहा है। GAIL का अपना पी/ई रेशियो 12.4x से 14.7x के बीच है, जो अडानी टोटल गैस (पी/ई 92.86x) और इंद्रप्रस्थ गैस (पी/ई 15.0x) जैसे कुछ साथियों की तुलना में इसे सस्ता दिखाता है। कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹1.07-1.09 ट्रिलियन है। इन चिंताओं के बावजूद, एनालिस्ट्स GAIL पर ज्यादातर 'बाय' रेटिंग दे रहे हैं, जिनका औसत टारगेट प्राइस ₹190-₹204 के बीच है। उदाहरण के लिए, प्रभुदास लीलाधर के एनालिस्ट्स ने ₹190 के टारगेट के साथ 'BUY' रेटिंग बरकरार रखी है। सेक्टर में 2023 में यूनिफाइड पाइपलाइन टैरिफ (UPT) जैसे सुधारों पर भी काम चल रहा है।
लंबी अवधि का क्या है मतलब?
PNGRB द्वारा कैपेक्स और ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर की समीक्षा को FY28 तक टालने का फैसला, उपभोक्ताओं पर तत्काल बोझ डालने से बचने की एक व्यावहारिक रणनीति हो सकती है, लेकिन यह GAIL की लंबी अवधि की रेवेन्यू स्ट्रीम और निवेश योजनाओं के लिए नियामक अनिश्चितता पैदा करता है। यह खींचतान GAIL की क्षमता को बाधित कर सकती है, जिससे राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक व्यापक बुनियादी ढांचे के विकास में देरी हो सकती है। इससे भविष्य में अधिक महत्वपूर्ण टैरिफ वृद्धि की आवश्यकता हो सकती है। कंपनी ने ऐतिहासिक रूप से एक स्वस्थ डिविडेंड पेआउट बनाए रखा है और लगभग 4.53% का डिविडेंड यील्ड प्रदान करती है, लेकिन यह विवाद उसके भविष्य के ग्रोथ की राह में एक अतिरिक्त जोखिम जोड़ता है।
