Commonwealth Fusion Systems और Helion Energy जैसी कंपनियां **2028** तक कमर्शियल पावर प्रोडक्शन शुरू करने की तैयारी में हैं। हालांकि सेक्टर में भारी फंडिंग आ रही है, लेकिन निवेशकों को टेक्निकल रिलायबिलिटी और ग्रिड इंटीग्रेशन जैसी चुनौतियों पर नजर रखनी होगी।
फ्यूजन एनर्जी सेक्टर अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां प्राइवेट डेवलपर्स लैब की साइंस से निकलकर यूटिलिटी-स्केल पावर प्रोजेक्ट्स की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। Commonwealth Fusion Systems और Helion Energy, जो इस सेक्टर की दिग्गज कंपनियां हैं, जल्द ही TechCrunch Disrupt 2026 कॉन्फ्रेंस में कमर्शियल ग्रिड डिप्लॉयमेंट को लेकर चर्चा करेंगी।
Commonwealth Fusion Systems की रणनीति
कंपनी अपनी 'ARC' कमर्शियल प्लांट पर काम कर रही है, जो इसके SPARC डेमोंस्ट्रेशन मशीन के बाद का अगला पड़ाव है। अप्रैल में कंपनी ने PJM Interconnection में आवेदन किया है, जो अमेरिका के सबसे बड़े होलसेल इलेक्ट्रिसिटी मार्केट का ऑपरेटर है। यह ग्रिड से जुड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कंपनी को अब तक कुल $4 बिलियन की फंडिंग मिल चुकी है, जिसमें जुलाई में जुटाई गई $1 बिलियन की राशि भी शामिल है।
Helion Energy का मास्टर प्लान
Helion Energy का फोकस 50-मेगावाट वाले Orion प्लांट पर है। कंपनी ने Microsoft के साथ 2028 तक बिजली आपूर्ति का करार किया है, जो कंपनी के लिए रिवेन्यू का एक स्पष्ट रास्ता बनाता है। हाल ही में कंपनी के Polaris प्रोटोटाइप ने 15 करोड़ डिग्री सेल्सियस का तापमान हासिल किया है, जो इसकी तकनीक की सफलता को साबित करता है। सितंबर में कंपनी ने $500 मिलियन की सीरीज G फंडिंग पूरी की है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को यह समझना होगा कि लैब से निकलकर ग्रिड तक का सफर आसान नहीं है। इन प्रोजेक्ट्स में भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) लगता है, जिसका मतलब है कि प्रॉफिटेबिलिटी तक पहुंचने में लंबा समय लगेगा। अभी कंपनियां 'कैश बर्न' फेज में हैं और इंजीनियरिंग की जटिलताओं को सुलझा रही हैं। निवेशकों को रेगुलेटरी अप्रूवल्स और कंस्ट्रक्शन की लागत पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
