Fujiyama Power Systems ने रतलाम, मध्य प्रदेश में **1.2 GW** का सोलर सेल प्लांट लगाने की घोषणा की है। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी **₹400 करोड़** तक का निवेश करेगी, जिसका मकसद प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाना और मार्जिन में सुधार करना है।
बड़े विस्तार की तैयारी
Fujiyama Power Systems इस नई फैसिलिटी पर ₹350 करोड़ से ₹400 करोड़ तक खर्च करने जा रही है। कंपनी का लक्ष्य इस प्लांट को मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के अंत तक चालू करना है। इस कदम के जरिए कंपनी वर्टिकल इंटीग्रेशन पर जोर दे रही है, ताकि प्रोडक्शन लागत को कंट्रोल किया जा सके और 'मेक इन इंडिया' के तहत घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा सके।
नई तकनीक से बढ़ेगी एफिशिएंसी
कंपनी ने इस प्लांट के लिए TOPCon तकनीक को चुना है, जो पुरानी PERC आर्किटेक्चर से कहीं ज्यादा बेहतर है। इसकी मदद से कंपनी सोलर सेल की कन्वर्जन एफिशिएंसी को बढ़ा सकेगी, जो आजकल मार्केट की सबसे बड़ी मांग है। इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग से कंपनी को रॉ मटीरियल के उतार-चढ़ाव और ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतों से भी काफी राहत मिलेगी।
क्या है बिजनेस पर असर?
इस नए प्लांट के साथ, कंपनी की कुल सोलर सेल क्षमता बढ़कर 2.3 GW हो जाएगी। दादरी (उत्तर प्रदेश) में पहले से मौजूद 1.1 GW की फैसिलिटी और 3.6 GW की सोलर मॉड्यूल क्षमता के साथ, कंपनी अब सोलर सेक्टर में एक बड़े प्लेयर के रूप में उभर रही है। अगर कंपनी पूरी क्षमता के साथ प्लांट चला पाती है, तो भविष्य में मुनाफे (Profit Margins) में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Risks)
इतने बड़े निवेश से कंपनी का कर्ज (Debt) बढ़ सकता है, इसलिए निवेशकों को अगले कुछ क्वार्टर्स में कंपनी के डेट-टू-इक्विटी रेशियो और ब्याज खर्च पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा, सोलर सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और मॉड्यूल की कीमतों पर दबाव भी एक रिस्क है। कंपनी का ALMM नियमों का पालन करना और समय पर प्रोजेक्ट पूरा करना इसकी सफलता के लिए सबसे जरूरी होगा।
