फिनलैंड की एनर्जी कंपनी Fortum ने अपनी भारतीय इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग यूनिट, Glida को JBM Group को बेचने का प्लान रद्द कर दिया है। अब कंपनी **961** चार्जिंग पॉइंट्स के अपने नेटवर्क को खुद संभालेगी और भारतीय बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखेगी।
सौदे से पीछे क्यों हटी कंपनी?
फिनलैंड की दिग्गज कंपनी Fortum Oyj ने भारत के EV चार्जिंग सेक्टर से बाहर निकलने का अपना इरादा बदल लिया है। कंपनी ने गुरुगाम-बेस्ड JBM Group के साथ हुई अपनी एक्सक्लूसिव डील को खत्म कर दिया है। इसका मतलब साफ है कि अब Glida का मालिकाना हक और मैनेजमेंट Fortum के ही पास रहेगा, जो देश भर में 961 चार्जिंग पॉइंट्स का संचालन कर रही है।
बाजार की स्थिति और चुनौतियां
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर उत्साह बढ़ रहा है। Vahan रजिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, 2026 के पहले 10 महीनों में EV अडॉप्शन रेट 10% के पार निकल चुका है, जो 2022 के मुकाबले काफी ज्यादा है। हालांकि, चार्जिंग स्टेशन का बिजनेस काफी 'कैपिटल-इन्टेन्सिव' यानी भारी निवेश वाला है। Tata Power और Jio-bp जैसे बड़े खिलाड़ी इस सेगमेंट में पहले से ही आक्रामक विस्तार कर रहे हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गई है।
प्रॉफिटेबिलिटी की पहेली
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बिजनेस में मुनाफा कब दिखेगा। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि चार्जिंग सेक्टर में सस्टेनेबल मार्जिन तब तक हासिल करना मुश्किल है, जब तक कि देश में EV पैठ 20% का आंकड़ा पार न कर ले। फिलहाल, कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर के भारी खर्च और यूटिलाइजेशन रेट्स में उतार-चढ़ाव जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
Fortum का यह यू-टर्न संकेत देता है कि कंपनी अब इस एसेट को लंबी अवधि के लिए एक वैल्यू क्रिएटर के तौर पर देख रही है। भविष्य में निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी अपने 961 चार्जिंग पॉइंट्स की उपयोगिता यानी 'यूटिलाइजेशन रेट' को कैसे बेहतर करती है और अपने नेटवर्क विस्तार के लिए कितना कैपिटल इंफ्यूज करती है।
