2026 में एनर्जी सेक्टर (Energy Sector) ने बाजार की बाजी मार ली है। साल की शुरुआत से अब तक इसने 36% का शानदार रिटर्न दिया है, जिससे यह बाकी सेक्टर्स से काफी आगे निकल गया है। खास तौर पर मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने एनर्जी शेयरों को खूब फायदा पहुंचाया है। तेल की कीमतें $104 प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं और एनालिस्ट्स का मानना है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सिक्योरिटी की बढ़ती मांग के चलते यह $150 प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती है। Energy Select Sector SPDR Fund (XLE) में भी 25.39 मिलियन शेयरों का कारोबार हुआ।
हालांकि, एनर्जी सेक्टर की वैल्यूएशन (Valuation) थोड़ी महंगी हो गई है। इसका P/E रेशियो 23.00 है, जो पिछले 3 सालों के औसत से 72% ज्यादा है। हाल ही में 5 अप्रैल, 2026 को खत्म हुए हफ्ते में शेयर में 3.69% की गिरावट भी देखी गई, जो प्रॉफिट टेकिंग (Profit Taking) का संकेत हो सकता है। ऐसे में इस सेक्टर की वोलेटिलिटी (Volatility) को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इसके उलट, टेक्नोलॉजी सेक्टर (Technology Sector) मुश्किलों में घिरा हुआ है। Technology Select Sector SPDR Fund (XLK) का साल का रिटर्न 7% से ज्यादा गिरकर निगेटिव टेरेटरी में पहुंच गया है। 6 अप्रैल, 2026 को XLK $136.78 पर बंद हुआ, जिसमें 10.15 मिलियन शेयर ट्रेड हुए। AI इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग, खासकर NVIDIA और Microsoft जैसी कंपनियों से, कुछ सपोर्ट दे रही है, लेकिन निवेशकों का उत्साह कम होता दिख रहा है। AI को लेकर 'फैटीग' (Fatigue) साफ है और निवेशक अब इस 'हाइप' (Hype) से ऊब चुके हैं। इसके अलावा, बढ़ती इंटरेस्ट रेट्स (Interest Rates) की चिंताएं भी वैल्यूएशन पर असर डाल रही हैं।
मार्केट में एक बड़ा सेक्टर रोटेशन (Sector Rotation) देखने को मिल रहा है। 2026 की पहली तिमाही में एनर्जी सेक्टर 37.9% उछला, साथ ही मटेरियल्स (Materials) 10.67% और इंडस्ट्रियल्स (Industrials) भी मजबूत रहे। यह ट्रेंड उन शेयरों को आगे बढ़ा रहा है जो ठोस गुड्स (Tangible Goods) और जरूरी सेवाएं (Essential Services) बनाते हैं, बजाय की स्पेकुलेटिव (Speculative) निवेशों के। कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी (Consumer Discretionary) और फाइनेंशियल (Financials) सेक्टर टेक्नोलॉजी से भी पीछे रह गए हैं।
एनर्जी सेक्टर, भले ही भू-राजनीतिक सप्लाई शॉक और AI पावर इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग से लाभान्वित हुआ हो, लेकिन इसकी रैली कितनी टिकाऊ है, इस पर सवाल हैं। सेक्टर का P/E रेशियो 72% ऊपर होना महंगा बताता है। मध्य पूर्व के बढ़ते तनाव से कीमतों में भारी वोलेटिलिटी और महंगाई बढ़ने का खतरा है। वहीं, टेक्नोलॉजी सेक्टर की कमजोरी सिर्फ इंटरेस्ट रेट्स की वजह से नहीं है। AI पर निर्भरता और भविष्य की कमाई पर आधारित वैल्यूएशन इसे डिस्काउंट रेट्स में बदलाव के प्रति संवेदनशील बनाती है।
कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि डेटा सेंटर बिल्डआउट के चलते एनर्जी शेयरों में डिमांड बनी रह सकती है। लेकिन, कुछ और लोग चेता रहे हैं कि यह तेजी काफी हद तक अप्रत्याशित भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर है। टेक्नोलॉजी के लिए, प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखना और आर्थिक मंदी के बावजूद AI-संचालित कैपिटल एक्सपेंडिचर जारी रखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल, बाजार का रुख ग्रोथ-ओरिएंटेड टेक की बजाय टेंजिबल एसेट्स (Tangible Assets) और सिक्योरिटी की ओर है, जो इस सेक्टर रोटेशन के जारी रहने का संकेत देता है।