हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन ने Eleven Power को गुरुग्राम और नूह में बिजली वितरण का **25 साल** का लाइसेंस दे दिया है। इसके साथ ही राज्य में बिजली वितरण का सरकारी एकाधिकार खत्म हो गया है। कंपनी को अब **60 दिनों** के भीतर अपना ग्रिड विस्तार प्लान पेश करना होगा।
हरियाणा के पावर सेक्टर में बड़ा बदलाव
Haryana Electricity Regulatory Commission (HERC) के इस फैसले ने राज्य के बिजली वितरण के ढांचे को बदल कर रख दिया है। Eleven Power Pvt Ltd को 25 साल के लिए लाइसेंस मिलने का मतलब है कि अब ग्राहकों को पहली बार सरकारी कंपनी Dakshin Haryana Bijli Vitran Nigam (DHBVN) के अलावा एक और विकल्प मिलेगा।
क्या है कानून?
Electricity Act of 2003 की Section 14 के तहत कंपनी को अब रेजिडेंशियल, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहकों को बिजली सप्लाई करने की अनुमति होगी। इसका मुख्य मकसद बाजार में कॉम्पिटिशन लाना है ताकि ग्राहकों को बेहतर सर्विस मिल सके।
राहें आसान नहीं हैं (Risks & Challenges)
हालांकि यह सुनने में काफी बड़ा कदम है, लेकिन जमीन पर इसे लागू करना बेहद कठिन है। एक पैरेलल बिजली ग्रिड खड़ा करने के लिए भारी निवेश की जरूरत होती है। इसमें सब-स्टेशन बनाना, ट्रांसफॉर्मर लगाना और केबल बिछाने का काम शामिल है, जो कि काफी खर्चीला और समय लेने वाला है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि:
- Right of Way (RoW): शहरी इलाकों में खुदाई और परमिशन लेने में देरी का बड़ा रिस्क होता है।
- Infrastructure Cost: प्रोजेक्ट की लागत अनुमान से बढ़ सकती है, जो कंपनी के मुनाफे पर दबाव डाल सकती है।
- 60 दिनों का डेडलाइन: कंपनी को अगले 60 दिनों में अपना पूरा रोडमैप रेगुलेटर को देना होगा, जिससे पता चलेगा कि उनका मॉडल कितना व्यावहारिक है।
DHBVN से मुकाबला
DHBVN के पास पहले से ही स्थापित नेटवर्क और ग्राहक आधार है, जो एक बड़ा कॉम्पिटिटिव एडवांटेज है। Eleven Power की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कैसे बिजली खरीद की जटिलताओं को मैनेज करते हैं और क्या वे सरकार से कम कीमत या बेहतर सर्विस देने में सक्षम हैं। निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण 'मॉनिटरेबल' फैक्टर कंपनी द्वारा पेश किया जाने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान होगा।
