Eastern Coalfields Limited (ECL) ने खांडरा कोलियरी (Khandra Colliery) में सुरक्षा के मद्देनजर इमरजेंसी सीलिंग शुरू की है। नीलकंठ मंदिर के पास जमीन में दरारें आने के बाद यह कदम उठाया गया है, ताकि कोयला खदानों में आग लगने के खतरे को रोका जा सके।
सुरक्षा की कवायद और तकनीकी टीम
पश्चिम बंगाल स्थित खांडरा कोलियरी में 28 जुलाई, 2026 को नीलकंठ मंदिर के पास सतह पर दरारें देखी गई थीं। Coal India Limited की सब्सिडियरी, Eastern Coalfields Limited (ECL) ने इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत सीलिंग का काम शुरू कर दिया है। Central Institute of Mining and Fuel Research (CIMFR) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कंपनी टनल के अंदर हवा के प्रवेश को रोकने का काम कर रही है, ताकि स्पॉन्टेनियस हीटिंग और आग के खतरों को टाला जा सके। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार के विस्फोट की खबरें आधारहीन हैं।
अवैध निर्माण से काम में बाधा
सुरक्षा कार्यों के दौरान एक बड़ी चुनौती सामने आई है। खदान के प्रभावित क्षेत्र के पास कुछ अवैध निर्माण और बस्तियां मौजूद हैं, जो सरफेस-फिलिंग की प्रक्रिया में बाधा डाल रही हैं। यह प्रक्रिया जमीन को स्थिर करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन अतिक्रमण के कारण काम की रफ्तार प्रभावित हो रही है।
निवेशकों के लिए जोखिम और वित्तीय स्थिति
यह घटना अंडरग्राउंड माइनिंग में मौजूद परिचालन जोखिमों को दर्शाती है। कंपनी के फाइनेंशियल स्वास्थ्य पर नजर डालें तो 2025-26 फाइनेंशियल ईयर में ECL को ₹1,257 करोड़ का प्री-टैक्स लॉस हुआ था। अंडरग्राउंड माइनिंग की पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई फिक्स्ड कॉस्ट के चलते कंपनी पर पहले से ही दबाव है।
अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ECL कितनी तेजी से साइट को स्टेबल कर पाती है। यदि यह काम लंबा खिंचता है, तो उत्पादन में रुकावट के कारण कंपनी की ऑपरेशनल कॉस्ट और बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर Coal India के ओवरऑल परफॉर्मेंस पर भी पड़ सकता है।
