हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से European Union की ऊर्जा लागत में **€100 बिलियन** का भारी उछाल आया है। सप्लाई में बढ़ोतरी के बिना बढ़ते खर्च और सर्दियों में डीजल की संभावित कमी ने पूरे यूरोप में चिंता बढ़ा दी है।
भारी खर्च, लेकिन सप्लाई जस की तस
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से मचे कोहराम के चलते यूरोप को पहले के मुकाबले €100 बिलियन अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इतना ज्यादा प्रीमियम देने के बावजूद फ्यूल सप्लाई में कोई इजाफा नहीं हुआ है। जैसे-जैसे सर्दियां नजदीक आ रही हैं, यूरोप की इकोनॉमिक स्टेबिलिटी पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
डीजल की किल्लत का साया
यूरोप के लिए सबसे बड़ा खतरा डीजल की संभावित शॉर्टेज है। वर्तमान में यूरोप अपनी जरूरत का लगभग 50% डीजल अमेरिका से आयात करता है। अगर अमेरिका ने अपने घरेलू मार्केट को बचाने के लिए एक्सपोर्ट पर कोई पाबंदी लगाई, तो यूरोपीय देशों के सामने सर्दियों में गहरा संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल EU के अधिकारी कूटनीतिक स्तर पर सप्लाई लाइन्स को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं।
ग्रीन एनर्जी और आत्मनिर्भरता की ओर
इस संकट ने EU लीडर्स को तेजी से बदलाव के लिए मजबूर कर दिया है। डबलिन में हुई बैठक में EU एनर्जी कमिश्नर Dan Jorgensen ने कहा कि आयातित जीवाश्म ईंधन पर यह निर्भरता अब अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा (Existential Threat) बन गई है। अब ध्यान लोकल ग्रीन एनर्जी सोर्सेज जैसे विंड और सोलर पर शिफ्ट किया जा रहा है।
फिनलैंड बना रोल मॉडल
इस बीच, फिनलैंड को पूरे यूरोप के लिए एक उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। फिनलैंड अपनी 95% बिजली न्यूक्लियर, हाइड्रोपावर और अन्य घरेलू सोर्सेज से पैदा करता है, जिससे वह वैश्विक बाजार की अस्थिरता से सुरक्षित है। अन्य यूरोपीय देश अब अपनी एनर्जी पॉलिसी को फिनलैंड जैसा बनाने पर विचार कर रहे हैं।
निवेशकों के नजरिए से देखें, तो यूरोप में ऊर्जा-गहन (energy-intensive) उद्योगों के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। आने वाले समय में लोकल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में बड़े बदलाव और निवेश की रणनीतियों में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
