पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ किया है कि E25 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल का परीक्षण अभी भी जारी है, और E20 फ्यूल के प्रदर्शन पर चिंताएं निराधार हैं। वहीं, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भारत के स्वच्छ वैकल्पिक ईंधनों की ओर बढ़ने के प्रयासों के तहत हाइड्रोजन से चलने वाले वाणिज्यिक वाहनों, जिनमें टाटा मोटर्स के नए ट्रक मॉडल भी शामिल हैं, को बढ़ावा दे रहे हैं।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भारत के इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (ethanol blending program) की स्थिति स्पष्ट की है, खासकर E25 फ्यूल के भविष्य में आने को लेकर चिंताओं को दूर किया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मौजूदा मिश्रणों के साथ परिचालन संबंधी समस्याओं की खबरें गलत हैं। सरकार ने पुष्टि की है कि E20 फ्यूल, जिसमें 20% इथेनॉल होता है, अप्रैल 2025 से उपयोग में है, लेकिन E25 की ओर संक्रमण (transition) अभी भी परीक्षण चरण में है। किसी भी व्यापक कार्यान्वयन पर विचार करने से पहले इंजन की अनुकूलता (compatibility) और प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक परीक्षण (trials) चल रहे हैं।
Puri ने इस बात पर जोर दिया कि E25 के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया में परीक्षण डेटा का विस्तृत मूल्यांकन और प्रमुख हितधारकों, जिनमें प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता (automobile manufacturers) शामिल हैं, के साथ परामर्श शामिल होगा। मौजूदा E20 मिश्रण के संबंध में, मंत्री ने नोट किया कि वाहन निर्माताओं ने पुष्टि की है कि उनके इंजन फ्यूल के अनुकूल हैं, जिससे सोशल मीडिया पर चल रही ईंधन दक्षता (fuel efficiency) में कमी या इंजन क्षति (engine damage) के दावों का खंडन होता है। सरकार का ध्यान वाहन स्वास्थ्य को बनाए रखने के साथ-साथ राष्ट्रीय ऊर्जा मिश्रण (national energy mix) में जैव ईंधन (biofuels) की हिस्सेदारी को धीरे-धीरे बढ़ाना है।
हाइड्रोजन मोबिलिटी और वाणिज्यिक परिवहन
जबकि पेट्रोलियम मंत्रालय इथेनॉल सम्मिश्रण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में हाइड्रोजन-संचालित तकनीक (hydrogen-powered technology) पेश करने के प्रयासों को तेज कर रहा है। मंत्री नितिन गडकरी ने विशेष रूप से ट्रकों और बसों जैसे भारी-भरकम परिवहन के लिए, हाइड्रोजन को एक दीर्घकालिक ईंधन स्रोत (long-term fuel source) के रूप में अपनी क्षमता पर प्रकाश डाला। यह पहल पारंपरिक जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) पर निर्भरता कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें इलेक्ट्रिक, फ्लेक्स-फ्यूल (flex-fuel) और हाइड्रोजन-आधारित प्रणालियों सहित कई प्रौद्योगिकी मार्ग (technology pathways) शामिल हैं।
वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में हालिया विकास इस जोर को दर्शाता है, जिसमें टाटा मोटर्स (Tata Motors) ने फ्यूल सेल तकनीक (fuel cell technology) और संशोधित आंतरिक दहन इंजन (modified internal combustion engines) दोनों का उपयोग करने वाले हाइड्रोजन-संचालित ट्रक मॉडल लॉन्च किए हैं। इसके अतिरिक्त, नागपुर में एक पायलट प्रोजेक्ट (pilot project) सार्वजनिक परिवहन के लिए हाइड्रोजन-संचालित बसों की व्यवहार्यता (feasibility) का परीक्षण कर रहा है। इन परियोजनाओं में अक्सर ईंधन वितरण (fuel distribution) से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) की चुनौतियों का समाधान करने के लिए साइट पर हाइड्रोजन उत्पादन (on-site hydrogen production) शामिल होता है। ऑटोमोटिव और ऊर्जा क्षेत्रों की निगरानी करने वाले निवेशक इन पायलट कार्यक्रमों की प्रगति, हाइड्रोजन ट्रकों की व्यावसायिक व्यवहार्यता (commercial viability) और भविष्य के इथेनॉल सम्मिश्रण मानकों के लिए नियामक समय-सीमा (regulatory timelines) को ट्रैक कर सकते हैं, क्योंकि ये कारक भारतीय ऑटोमोबाइल और ऊर्जा कंपनियों के लिए भविष्य के पूंजीगत व्यय (capital spending) और उत्पाद रणनीतियों को प्रभावित करेंगे।
