Dilip Buildcon ने Alpha Alternatives को **₹8,400 करोड़** की सोलर और ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स बेचने का ऐलान किया है। यह कंपनी के **FY 2027-28** तक नेट डेट-फ्री (Net Debt-Free) होने और एसेट-लाइट (Asset-Light) बिजनेस मॉडल की ओर बढ़ने की योजना का हिस्सा है। यह डील ऐसे समय में हुई है जब कंपनी के तिमाही मुनाफे में **51%** की बड़ी गिरावट आई है।
बड़े सौदे से कर्ज घटाएगी Dilip Buildcon
Dilip Buildcon ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने सोलर और ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स को Alpha Alternatives को बेचने का करार किया है। इस सौदे की कुल कीमत लगभग ₹8,400 करोड़ है। इस स्ट्रैटेजिक डील के तहत कंपनी अपनी दो स्पेशल पर्पज व्हीकल्स (SPVs) - Mekhali Power Transmission Limited और DBL Renewable Private Limited में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी। यह सौदा कई चरणों में पूरा होगा और कंपनी के बैलेंस शीट को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।
एसेट-लाइट मॉडल की ओर झुकाव
इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां अक्सर कैपिटल लॉक-अप (Capital Lock-up) को कम करने और अपने मुख्य काम यानी कंस्ट्रक्शन और एग्जीक्यूशन (Construction & Execution) पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एसेट-लाइट मॉडल अपनाती हैं। Dilip Buildcon भी इसी राह पर चल पड़ी है। इन पावर एसेट्स को बेचकर कंपनी अपने लिए कैपिटल फ्री (Capital Free) करना चाहती है और अपने उधारी के स्तर को कम करना चाहती है। कंपनी का लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2027-28 तक पूरी तरह से डेट-फ्री (Debt-Free) हो जाना है।
बिकने वाली एसेट्स का विवरण
Mekhali Power Transmission कंपनी कर्नाटक के बेलगावी में 400 kV सब-स्टेशन प्रोजेक्ट चला रही है, जिसमें 470 सर्किट किलोमीटर का नेटवर्क है। वहीं, DBL Renewable के पास मध्य प्रदेश में 1,363 मेगावाट का सोलर पोर्टफोलियो है। दिलचस्प बात यह है कि Dilip Buildcon ने हाल ही में मई 2026 में ही Mekhali Power Transmission को REC Power Development and Consultancy Limited से अधिग्रहित (Acquire) किया था, जो संपत्ति के तेजी से मोनेटाइजेशन (Monetization) का संकेत देता है।
तिमाही नतीजों का दबाव
यह डील ऐसे समय में आई है जब कंपनी को फाइनेंशियल दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अपने हालिया तिमाही नतीजों में, Dilip Buildcon का मुनाफा 51% घटकर केवल ₹113 करोड़ रह गया था। ऐसे में, एसेट बिक्री से प्राप्त होने वाली रकम कंपनी की लिक्विडिटी (Liquidity) बढ़ाने और कर्ज चुकाने में काफी मददगार साबित होगी। इतनी बड़ी संपत्ति को मोनेटाइज करने की क्षमता कंपनी के कैश फ्लो (Cash Flow) को सहारा देगी।
आगे क्या?
यह सौदा अभी कुछ शर्तों के अधीन है, जिनमें रेग्युलेटरी अप्रूवल (Regulatory Approvals) और फाइनल एग्रीमेंट्स (Definitive Agreements) का पूरा होना शामिल है। हालांकि, कर्ज घटाने की दिशा में यह एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह देखना अहम होगा कि यह चरणबद्ध क्लोजिंग (Phased Closing) प्रक्रिया कितनी प्रभावी होती है और कंपनी के डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) पर इसका क्या असर पड़ता है। बाजार की नजरें इस बात पर रहेंगी कि कंपनी इन पैसों का इस्तेमाल अपने मार्जिन्स (Margins) को बेहतर बनाने और फाइनेंशियल परफॉरमेंस (Financial Performance) को स्थिर करने में कैसे करती है।
