दिल्ली में 'PM Surya Ghar' योजना के तहत रूफटॉप सोलर के लिए 1 महीने में 1 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हुए हैं। इस बड़े बदलाव के बीच पावर सेक्टर के निवेशकों के लिए ग्रिड इंटीग्रेशन की रफ्तार सबसे बड़ा मॉनिटरेबल फैक्टर है।
सोलर अडॉप्शन में बड़ी तेजी
राजधानी में सोलर एनर्जी की मांग ने रफ्तार पकड़ ली है। नए स्टेट पोर्टल के लॉन्च के महज एक महीने के भीतर ही 1 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक दिल्ली में 2,30,000 सोलर इंस्टालेशन पूरे करने का है। बवाना और नरेला जैसे इंडस्ट्रियल हब में बड़ी छतों के कारण हाई-कैपेसिटी सिस्टम लगाने की होड़ मची है।
सब्सिडी का गणित
इस डिमांड के पीछे एक मजबूत फाइनेंशियल इंसेंटिव स्ट्रक्चर है। केंद्र सरकार की तरफ से ₹78,000 की सब्सिडी के साथ, दिल्ली सरकार इसमें अतिरिक्त ₹30,000 की मदद दे रही है। यह जॉइंट सब्सिडी आम ग्राहकों के लिए सोलर सिस्टम लगवाना काफी किफायती बना रही है।
पावर कंपनियों पर असर और ग्रिड की चुनौती
रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों में BSES Rajdhani सबसे आगे है, जिसने 37,000 से ज्यादा आवेदन जुटाए हैं। वहीं, BSES Yamuna और Tata Power Delhi Distribution Limited (TPDDL) ने भी 32,000-32,000 के करीब आवेदन दर्ज किए हैं।
पावर सेक्टर के निवेशकों के लिए यह एक 'डबल-एज्ड स्वोर्ड' की तरह है। एक तरफ यह रिन्यूएबल एनर्जी गोल्स को पूरा करता है, तो दूसरी तरफ डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए ग्रिड मैनेजमेंट एक बड़ी चुनौती है। ग्रिड को 'बाय-डायरेक्शनल' पावर फ्लो के लिए तैयार करना होगा, ताकि सोलर से बनने वाली एक्स्ट्रा बिजली को बिना किसी रुकावट के ग्रिड में भेजा जा सके।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये कंपनियां कितनी तेजी से नेट-मीटरिंग अप्रूवल देती हैं। शेयरहोल्डर्स के लिए मुख्य मॉनिटरेबल यह होगा कि कितनी जल्दी ये पेंडिंग एप्लीकेशन्स फिजिकल ग्रिड कनेक्शन में तब्दील होती हैं और इनका कंपनियों के लोड प्रोफाइल पर क्या असर पड़ता है।
