बिजली की खपत में भारी उछाल
दिल्ली की बिजली की खपत ने मई महीने में नया रिकॉर्ड बनाया है, जो 25 मई, 2026 को 8,439 मेगावॉट तक पहुंच गई। पिछले छह दिनों में यह चौथी बार है जब मांग 8,000 मेगावॉट के पार गई है। यह पिछले वर्षों की तुलना में एक बड़ा बदलाव है, जहां मई 2025 में मांग 8,000 मेगावॉट से नीचे थी। इस साल गर्मी जल्दी और ज़्यादा तीव्रता से शुरू हुई है, जिसके कारण दिन की तेज गर्मी और असामान्य रूप से गर्म रातों ने मई 2026 में लगभग 80% दिनों में बिजली की खपत को पिछले साल से बढ़ा दिया है।
लोड के बावजूद ग्रिड मजबूत
प्रमुख बिजली वितरकों, जिनमें BSES राजधानी, BSES यमुना और टाटा पावर-डीडीएल शामिल हैं, ने ग्रिड संचालन में किसी बड़ी बाधा की रिपोर्ट नहीं की है। इस स्थिरता का श्रेय लंबे समय से चले आ रहे पावर परचेज एग्रीमेंट्स (Power Purchase Agreements), अन्य राज्यों के साथ एनर्जी बैंकिंग (Energy Banking) और AI-संचालित डिमांड फोरकास्टिंग (AI-powered Demand Forecasting) को दिया जा रहा है। आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, कंपनियों ने BSES के लिए लगभग 2,670 मेगावॉट और टाटा पावर-डीडीएल के लिए 1,115 मेगावॉट की रिन्यूएबल क्षमता (Renewable Capacity) में निवेश किया है, जिसमें सोलर, विंड, हाइड्रो और बैटरी स्टोरेज शामिल हैं।
वित्तीय और रेगुलेटरी चुनौतियां
वर्तमान ग्रिड प्रदर्शन के बावजूद, दीर्घकालिक स्थिरता वित्तीय और रेगुलेटरी चुनौतियों का सामना कर रही है। दिल्ली की बिजली कंपनियां उच्च खरीद लागत और ₹12,700 करोड़ से अधिक के महत्वपूर्ण रेगुलेटरी एसेट्स (Regulatory Assets) से जूझ रही हैं। कुछ रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर-समर्थित वितरकों को प्रभावित करने वाली शेयरहोल्डिंग अटैचमेंट (Shareholding Attachments) के कारण वित्तीय लचीलापन भी एक चिंता का विषय है। सरकारी जेनरेटरों के प्रति आकस्मिक देनदारियां (Contingent Liabilities) और देर से भुगतान शुल्क (Late Payment Charges) पर विवाद परिचालन दबाव को बढ़ाते हैं। जबकि PPAC (Power Purchase Agreement Cost) जैसे लागत-वसूली तंत्र (Cost-recovery Mechanisms) कुछ वित्तीय बफर प्रदान करते हैं, बड़े रेगुलेटरी एसेट्स का समाधान एक प्रमुख संरचनात्मक मुद्दा बना हुआ है।
आगे क्या?
अनुमान है कि यदि अत्यधिक मौसम जारी रहा तो पीक डिमांड 9,000 मेगावॉट तक पहुंच सकती है। जलवायु पैटर्न में बदलाव, जो जल्दी गर्मी की शुरुआत और गर्म रातों ला रहे हैं, दिल्ली के बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को उसके मूल डिजाइन से परे अनुकूलन के लिए मजबूर कर रहे हैं। भविष्य की विश्वसनीयता ट्रांसमिशन क्षमता (Transmission Capacity) का विस्तार करने और विकेन्द्रीकृत ऊर्जा भंडारण (Decentralized Energy Storage) में निवेश पर निर्भर करेगी।
