दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने रूफटॉप सोलर पैनल लगाने के नियमों को आसान बना दिया है। अब **10 किलोवाट** तक के सिस्टम के लिए टेक्निकल एनालिसिस की जरूरत नहीं होगी और इंस्टॉलेशन **25 दिन** के अंदर पूरा करना होगा। इस कदम से घरों में सोलर एनर्जी को बढ़ावा मिलेगा।
Detailed Coverage
घरेलू सोलर इंस्टॉलेशन पर असर
दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने अपने नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जिसका मकसद घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर पैनल लगवाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। पहले जहां तीन चरणों में काम होता था, वहीं अब इसे घटाकर दो चरणों में कर दिया गया है। इससे लोगों को सोलर एनर्जी अपनाने में कम समय और परेशानी होगी।
खास बात यह है कि 10 किलोवाट तक के सोलर सिस्टम के लिए अब टेक्निकल एनालिसिस और रजिस्ट्रेशन फीस नहीं देनी होगी। पहले इन सब डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और जांच में काफी समय लग जाता था। नए नियमों के तहत, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, इंस्पेक्शन और मीटर इंस्टॉलेशन सब एक ही फेज में होगा, जिससे लागत और समय दोनों की बचत होगी।
नए नियम और समय-सीमा
DERC ने यह भी तय किया है कि बिजली वितरण कंपनियां (discoms) 15 दिन के अंदर टेक्निकल एनालिसिस पूरा करेंगी। अगर वे इस समय-सीमा में काम नहीं करती हैं, तो आवेदन को 'डीम्ड अप्रूवल' यानी अपने आप स्वीकृत मान लिया जाएगा। इंस्टॉलेशन के बाद, सिस्टम टेस्टिंग और नेट मीटर लगाने का पूरा काम 25 दिन के अंदर खत्म करना होगा। कनेक्शन के लिए डिजिटल एग्रीमेंट की शुरुआत से फिजिकल कागजी कार्रवाई की जरूरत भी खत्म हो गई है।
सेक्टर और उपभोक्ताओं के लिए मतलब
ये बदलाव 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' जैसे राष्ट्रीय अभियानों को भी बढ़ावा देंगे। इससे योग्य परिवार आसानी से सब्सिडी वाले सोलर सिस्टम लगवा सकेंगे। हालांकि, स्थानीय बिजली कंपनियों को इन नियमों का पालन करने में थोड़ी चुनौती आ सकती है, क्योंकि उन्हें तय समय-सीमा में ज्यादा एप्लीकेशन को हैंडल करना होगा। पावर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि दिल्ली में सोलर एनर्जी अपनाने की रफ्तार कितनी बढ़ती है और क्या दूसरे राज्य भी इसी तरह के नियम लागू करते हैं।
