📉 नतीजों का विश्लेषण
Deep Industries Limited ने Q3 FY'26 के लिए बेहतरीन वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 43.1% का शानदार इजाफा हुआ और यह ₹221.5 करोड़ दर्ज किया गया। वहीं, EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई) में 46.3% की मजबूत ग्रोथ देखी गई, जो ₹110.1 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी ने अपने EBITDA मार्जिन को 47.6% पर बनाए रखा, जो कि 46-48% के अनुमानित दायरे में है। सबसे खास बात यह है कि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 49.8% की भारी उछाल दर्ज की गई और यह ₹71.3 करोड़ रहा।
अगर पिछले नौ महीनों (9M FY'26) के नतीजों पर नज़र डालें, तो Deep Industries ने और भी मजबूत प्रदर्शन किया है। कंपनी का रेवेन्यू 57% बढ़कर ₹642 करोड़ रहा, जबकि EBITDA में 58% का उछाल आकर यह ₹318 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, PAT (Profit After Tax) 59.7% की शानदार बढ़त के साथ ₹204.3 करोड़ दर्ज किया गया।
🚀 फ्यूचर का प्लान और आउटलुक
कंपनी का मैनेजमेंट फ्यूचर को लेकर काफी पॉजिटिव दिख रहा है। उन्होंने अगले फाइनेंशियल ईयर, FY'27 के लिए 30-35% से अधिक रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान जताया है। इस साल FY'26 में कंपनी का रेवेन्यू करीब ₹850 करोड़ रहने की उम्मीद है, जबकि FY'27 में इसे बढ़ाकर ₹1,150 करोड़ करने का लक्ष्य रखा गया है। PEC प्रोजेक्ट से FY'27-'28 तक हर साल करीब ₹150 करोड़ का योगदान मिलने की उम्मीद है। Deep Industries सिर्फ मौजूदा बिजनेस तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS), कॉम्प्रेस्ड बायोगैस और हाइड्रोजन जैसे नए और उभरते सेक्टर्स में भी मौके तलाश रही है।
🚩 चुनौतियां और अगली चाल
हालांकि, अच्छी खबरों के साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। राजामुंदरी (Rajahmundry) में एक गैस लीकेज की घटना हुई, जिसे पांच दिन में कंट्रोल कर लिया गया। इस घटना से एक प्रोजेक्ट में 2-3 महीने की देरी हो सकती है और एक रिग नष्ट हो गया, हालांकि इसके नुकसान की भरपाई इंश्योरेंस से होने की उम्मीद है। डॉल्फिन बार्ज (Dolphin barge) पर भी कुछ अतिरिक्त खर्च आया, जिसे कंपनी एक बार का खर्च मान रही है।
कंपनी ने अपने क्वॉलिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी है। मैनेजमेंट का मानना है कि मौजूदा कम कर्ज स्तर के चलते, वे इंटरनल एक्रुअल्स (internal accruals) और डेट (debt) के जरिए भविष्य के ग्रोथ और कैपेक्स (Capex) को आसानी से फंड कर पाएंगे। गैस प्रोसेसिंग प्लांट और रिग्स के लिए रेगुलर कैपेक्स, साथ ही PEC प्रोजेक्ट के खर्चों को भी इसी तरह मैनेज किया जाएगा। कांदला एनर्जी (Kandla Energy) का अधिग्रहण FY'27 से कंपनी के रेवेन्यू में योगदान देना शुरू कर देगा। इसके अलावा, कंपनी ने दो नए रिग्स (rigs) तैनात किए हैं और मार्च की शुरुआत में एक और रिग आने वाला है, जिससे उनकी ऑपरेशनल क्षमताएं बढ़ेंगी। GAIL से मिला नया कॉन्ट्रैक्ट भी ऑर्डर बुक को मजबूती देगा।