Deendayal Port Authority और Assam Petro-Chemicals ने गुजरात में ई-मेथनॉल (e-methanol) प्लांट का आगाज किया है। इस ₹2,300 करोड़ के प्रोजेक्ट का लक्ष्य जहाजों के लिए ग्रीन फ्यूल हब बनाना है।
गुजरात के गांधीधाम में Deendayal Port Authority (DPA) और Assam Petro-Chemicals (APCL) ने मिलकर एक बड़े ई-मेथनॉल प्लांट की नींव रख दी है। ₹2,300 करोड़ की लागत वाली इस फैसिलिटी में हर दिन 150 टन ग्रीन मेथनॉल का उत्पादन होगा। इसका मकसद कांडला पोर्ट को ग्रीन फ्यूल का बड़ा सेंटर बनाना है, ताकि शिपिंग इंडस्ट्री पारंपरिक ईंधन से हटकर क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ सके।
बजट में क्यों हुआ बदलाव?
दिलचस्प बात यह है कि जनवरी में जब इस डील की शुरुआत हुई थी, तब अनुमानित लागत ₹1,200 करोड़ थी। अब इसे बढ़ाकर ₹2,300 करोड़ कर दिया गया है। कंपनी का मानना है कि ईधन के बेहतर स्टोरेज, प्रोडक्शन और सुरक्षित हैंडलिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना जरूरी है। इस पूरे प्रोजेक्ट से करीब 3,500 लोगों को सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की उम्मीद है।
ग्रीन फ्यूल और मार्केट का गणित
यह कदम भारत के 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' का एक हिस्सा है। हालांकि, रिटेल निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि यह दोनों कंपनियां फिलहाल स्टॉक मार्केट में लिस्टेड नहीं हैं। फिर भी, यह प्रोजेक्ट क्लीन एनर्जी सेक्टर के लिए एक बड़ा टेस्ट केस है।
इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या ये कंपनियां ग्रीन मेथनॉल को पारंपरिक ईंधनों के मुकाबले सस्ता और किफायती बना पाएंगी या नहीं। शिपिंग कंपनियां कीमतों को लेकर काफी संवेदनशील होती हैं, इसलिए इस प्लांट की कमर्शियल वायबिलिटी पर पूरे सेक्टर की नजरें टिकी होंगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह प्रोजेक्ट भविष्य में दूसरे पोर्ट्स के लिए भी एक मॉडल साबित होता है या नहीं।
