ईरान पर हमले का असर: DeFi फ्यूचर्स में तूफानी तेजी! 24/7 प्राइसिंग का कमाल, तेल हुआ महंगा

ENERGY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
ईरान पर हमले का असर: DeFi फ्यूचर्स में तूफानी तेजी! 24/7 प्राइसिंग का कमाल, तेल हुआ महंगा
Overview

अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए ताजा हमलों के बाद, डीसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस (DeFi) प्लेटफॉर्म Hyperliquid पर तेल से जुड़े परपेचुअल फ्यूचर्स (Perpetual Futures) में जबरदस्त उछाल देखा गया। इन कॉन्ट्रैक्ट्स में **5%** से अधिक की बढ़ोतरी हुई, जो ग्लोबल मार्केट बंद होने के बावजूद DeFi की रियल-टाइम रिस्क प्राइसिंग (Risk Pricing) क्षमता को दर्शाता है।

भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर: DeFi मार्केट में हलचल

अमेरिका और इजराइल की ओर से शनिवार, 28 फरवरी, 2026 को ईरान पर किए गए समन्वित मिसाइल हमलों के बाद, डीसेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज (DEX) Hyperliquid पर तेल से जुड़े परपेचुअल फ्यूचर्स (Perpetual Futures) में एकाएक तेजी आ गई। यह घटना भू-राजनीतिक जोखिमों के तुरंत मूल्यांकन में डीसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस (DeFi) की क्षमता को उजागर करती है, खासकर जब पारंपरिक वित्तीय बाजार सप्ताहांत पर बंद थे।

Hyperliquid पर रिकॉर्ड तेजी

इस हमले के तुरंत बाद, Hyperliquid पर तेल से जुड़े फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स में 5% से अधिक की तेजी दर्ज की गई। कुछ कॉन्ट्रैक्ट्स $71.26 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहे थे, जबकि अन्य $86.00 से ऊपर निकल गए। इन सौदों में लगभग 40 लाख डॉलर (4 Million USD) का वॉल्यूम (Volume) और 50 लाख डॉलर (5 Million USD) से अधिक का ओपन इंटरेस्ट (Open Interest) देखा गया। यह सक्रिय पोजीशनिंग को दर्शाता है।

पारंपरिक बाजारों से अलग, 24/7 मूल्य खोज

जब दुनिया भर के पारंपरिक वित्तीय बाजार सप्ताहांत की छुट्टी पर थे, तब Hyperliquid जैसे ऑन-चेन डेरिवेटिव्स प्लेटफॉर्म ने भू-राजनीतिक तनावों को तुरंत कीमत में शामिल करने का एक जरिया प्रदान किया। इसने वैश्विक घटनाओं के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया में एक स्पष्ट लाभ दिखाया। इसी बीच, सुरक्षित निवेश की मांग (Safe-haven demand) के कारण सोना (Gold) और चांदी (Silver) जैसी कीमती धातुओं में भी तेजी देखी गई।

मध्य पूर्व की अस्थिरता और तेल की सप्लाई पर असर

ईरान की सामरिक स्थिति, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण, चिंताएं बढ़ाता है। यह मार्ग सालाना वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% (लगभग 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन) का परिवहन करता है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान से जुड़े तनाव तेल की कीमतों को नाटकीय रूप से प्रभावित कर सकते हैं। एक पूर्ण शटडाउन की स्थिति में ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमतें $120 से $150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं।

महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर खतरा

विश्लेषकों ने बताया कि हमलों की आशंका में तेल की कीमतों में पहले से ही $4 से $10 प्रति बैरल का भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम शामिल था। Barclays ने अनुमान लगाया है कि यदि आपूर्ति में बाधा आती है तो ब्रेंट $80 प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इस तरह की मूल्य वृद्धि से महंगाई (Inflation) फिर भड़क सकती है, जिससे सेंट्रल बैंकों के लिए ब्याज दरों को नियंत्रित करना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना मुश्किल हो जाएगा। Oxford Economics ने अनुमान लगाया है कि ईरानी निर्यात में बाधाओं से वैश्विक जीडीपी (GDP) में 0.2% की कमी आ सकती है और अमेरिकी महंगाई 4.5% तक पहुंच सकती है, जिससे फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की ब्याज दरों में कटौती 2026 तक टल सकती है।

Hyperliquid का प्रदर्शन और भविष्य

हमलों के बाद, ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग $72.76 और WTI $67.32 के आसपास कारोबार कर रही थीं। Hyperliquid, अपने HIP-3 अपग्रेड के साथ, जिसने अनुमति-रहित एसेट लिस्टिंग (Permissionless asset listings) की सुविधा दी है, ने अपने कमोडिटी मार्केट में ओपन इंटरेस्ट में भारी वृद्धि देखी है। जनवरी 2026 में इसने अकेले 225 अरब डॉलर (225 Billion USD) से अधिक का परपेचुअल फ्यूचर्स वॉल्यूम संभाला और लगातार 30% से अधिक विकेन्द्रीकृत परपेचुअल वॉल्यूम पर कब्जा किया है, जो ऐसी रियल-टाइम प्राइसिंग घटनाओं की मेजबानी करने की अपनी बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

नियामक चुनौतियां और अन्य जोखिम

DeFi गतिविधि में इस उछाल के बावजूद, महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं। डीसेंट्रलाइज्ड डेरिवेटिव्स के लिए नियामक माहौल अभी भी अस्पष्ट है। अमेरिकी कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) ने पहले भी डीसेंट्रलाइज्ड एक्सचेंजों के खिलाफ कार्रवाई की है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य की भेद्यता (Vulnerability) एक निरंतर जोखिम है। डीसेंट्रलाइज्ड मार्केट की अंतर्निहित अस्थिरता (Volatility) और संभावित फ्लैश क्रैश (Flash Crashes) भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय हैं।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.