Constellation Energy को US Department of Energy से **$5 बिलियन** का लोन मिला है। इस फंड का इस्तेमाल **11** न्यूक्लियर रिएक्टर्स को अपग्रेड करने के लिए किया जाएगा, जिससे **1.1 गीगावाट** बिजली पैदा होगी और यह Google, Amazon व Meta के डेटा सेंटर्स को पावर देगी।
न्यूक्लियर पावर की नई ताकत
Constellation Energy ने अपने न्यूक्लियर पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए US Department of Energy के साथ एक बड़ा करार किया है। कंपनी इस $5 बिलियन के लोन का उपयोग 'अपरेटिंग' (uprating) तकनीक के जरिए 11 रिएक्टर्स की क्षमता बढ़ाने में करेगी। इलिनॉय, मैरीलैंड और पेंसिल्वेनिया में स्थित ये रिएक्टर्स अब ग्रिड में अतिरिक्त 1.1 गीगावाट बिजली जोड़ेंगे।
AI का बढ़ता दबाव और ऊर्जा की मांग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग के कारण डेटा सेंटर्स को 24/7 बिना रुके बिजली की जरूरत है। सौर और पवन ऊर्जा के मुकाबले न्यूक्लियर एनर्जी को एक ज्यादा भरोसेमंद 'बेसलोड' माना जा रहा है। यही वजह है कि Google, Amazon और Meta ने इन रिएक्टर्स से निकलने वाली ज्यादातर बिजली के लिए लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट साइन कर लिए हैं, जो Constellation Energy के लिए भविष्य में फिक्स्ड रेवेन्यू का एक पक्का जरिया बन गया है।
निवेश का गणित
इस प्रोजेक्ट के लिए Constellation Energy खुद $7 बिलियन से अधिक की पूंजी लगाएगी। सरकारी लोन मिलने से कंपनी पर फाइनेंसिंग का बोझ काफी कम हो गया है। मौजूदा साइट्स का उपयोग करने से कंपनी को नए लैंड और परमिट्स हासिल करने के झंझट से भी मुक्ति मिल गई है, जो इसे एक कुशल बिजनेस मॉडल बनाता है।
क्या हैं रिस्क?
इतने बड़े स्केल पर रिएक्टर्स को अपग्रेड करने में तकनीकी जोखिम और देरी की संभावना बनी रहती है। साथ ही, मार्केट में इस बात पर भी बहस छिड़ी है कि क्या डेटा सेंटर्स को प्राथमिकता देने से आम उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरों पर कोई असर पड़ेगा। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी समय रहते इन प्रोजेक्ट्स को कैसे पूरा करती है और लॉन्ग-टर्म कैश फ्लो पर इसका क्या असर पड़ता है।
